हाथियों का उत्पात जारीः भुडूपानी में परिवार को किया बेघर, ग्रामीणों में दहशत व्याप्त

कोरबा 21 जुलाई। जिले के दोनों वनमंडल में हाथी उत्पात की समस्या जस की तस कायम है। बीती रात भुडूपानी में हाथी के हमले में एक मकान काफी हद तक बर्बाद हो गया। हालांकि इसमें जनहानि नहीं हुई लेकिन अब परिवार के सामने सिर छिपाने की समस्या पैदा हो गई है। यहां-वहां विचरण कर रहे हाथियों की हरकतों से इलाके में रह रहे लोगों की जिंदगी दंाव पर है। उनके सामने असली चिंता इस बात की है कि इस दौर में आखिर जीवन कैसे सुरक्षित होगा।

जिले के कटघोरा वनमंडल में हाथियों ने एक बार फिर उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। यहां के एतमानगर, जटगा व केंदई रेंज में बड़ी संख्या में हाथी विचरण कर रहे हैं। एतमानगर में विचरणरत हाथियों ने बीती रात उत्पात मचाते हुए मड़ई सर्किल के भुडूपानी गांव में फूलकन्या कुजूर पति विजय कुजूर नामक महिला के मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया। इतना ही नहीं, वहां रखे घरेलू सामानों व बर्तन को भी नुकसान पहुंचाया। जिस समय हाथियों ने यहां धावा बोला महिला अपने परिवार के साथ सो रही थी। हाथियों के घर के पास आने की आहट सुनकर वह जागी और ग्रामीणों को इसकी सूचना दी, जिस पर ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचित किया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी तत्काल मौके पर पहुंचे और उत्पात मचा रहे हाथियों को खदेडने की कार्यवाही की। जिस पर हाथियों ने जंगल का रूख किया। हाथियों के जंगल जाने पर फूलकन्या कुजूर व उसके परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली। इससे पहले सभी काफी दहशत में थे। हाथियों का दल सुबह आगे बढकर गुरसिया परिसर पहुंच गया है। दल को आज सुबह यहां के जंगल में विचरण करते हुए देखा गया और इसकी सूचना वन विभाग को दी गई, जिस पर वन अमला मौके पर पहुंचकर हाथियों की निगरानी में जुट गया है। गुरसिया व आसपास के गांवों में मुनादी कराई जा रही है।

जिले में 52 हाथियों का दल कर रहा विचरण
कोरबा और कटघोरा वनमंडल में वर्तमान में विभिन्न वन परिक्षेत्रांतर्गत करीब 52 हाथी अलग-अलग समूह में विचरण कर रहे हैं। इनमें कोरबा वनमंडल के पसरखेत वन परिक्षेत्र के कोल्गा, कटघोरा वनमंडल के जटगा वनपरिक्षेत्र के जटगा व बासिन परिसर, एतमानगर के गुरसिया और केंदई रेंज के कोरबी एवं कापानवापारा में हाथियों का दल मौजूद है। इनकी मौजूदगी से ग्रामीणों में एक ओर जहां दहशत व्याप्त है, वहीं कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इन गांव के लोग जंगल के भीतर स्थित खेतों में नहीं जा पा रहे हैं, इससे कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण इससे परेशान व चिंतित हैं।

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