‘मेडे कॉल’ क्या है.. कैसे हुई इस शब्द की उत्पत्ति..? आइए जानते हैं इसका पूरा इतिहास..

नईदिल्ली। बीते 12 जून 2025 को अहमदाबाद (गुजरात) में एयर इंडिया का एक एयरो प्लेन एआई 171 उड़ान भरने के कुछ पलों बाद ही कैश हो गया था। प्लेन क्रैश से कुछ समय पहले प्लेन के कैप्टन यानी पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से संपर्क करते हुए ‘मेडे कॉल’ जारी की थी। इसके बाद यह शब्द चर्चित हो गया। आइए, जानिए ‘मेडे कॉल’ के बारे में।
कहां से आया टर्म ‘मेडे’
यह शब्द फ्रेंच भाषा के प्रचलित फ्रेज ‘म’आइडर’ से बना है, जिसका अर्थ होता है ‘हेल्प मी’ यानी मेरी मदद करो। चूंकि यह फ्रेंच फ्रेज सुनने में ‘मेडे’ जैसा प्रतीत होता है, इसलिए ‘म’आइडर’ की जगह ‘मेडे’ प्रचलित हो गया। अब तो हवाई उड़ान के दौरान आई इमरजेंसी से संबंधित ‘मेडे’ शब्द को दुनिया के लगभग सभी देशों के लोग समझते हैं। प्रायः हर देश और हर कंपनी की विमान सेवा में इमरजेंसी मैसेज के लिए ‘मेडे कॉल’ टर्म का ही यूज किया जाता है।
ऐसे हुई मेडे कॉल की ऑफिसियल शुरुआत
इस शब्द की शुरुआत 1923 में लंदन के क्रायडन एयरपोर्ट के वरिष्ठ रेडियो अधिकारी फेडरिक वॉकफोर्ड के आग्रह पर हुई और 1948 में इसे आधिकारिक (ऑफिसियल) मान्यता दी गई।
क्यों कहते हैं इसे मेडे कॉल
प्लेन के उड़ान के दौरान जब खराबी आ जाती है तब एयरो प्लेन से ‘मेडे, मेडे, मेडे’ का मैसेज दिया जाता है। पायलट को लगता है प्लेन खतरे में है, तो मा पुकारता है। यह संकट में दिया गया रेडियो सिग्नल है। जैसे ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल करने वाले ‘मेडे कॉल’ को सुनते है, वे जान जाते है कि एयरो प्लेन संकट में है और उसे मदद की जरूरत है।
तब करते हैं मेडे कॉल
मेडे कॉल एक आपात संदेश (इमरजेंसी मैसेज) होता है। इसे एयर प्लेन का पायलट उस समय करता है, जब विमान किसी गंभीर संकट में हो और यात्रियों या कू मेंबर्स की जान को खतरा हो। विमान का इंजन फेल होना, खराब मौसम, नेविगेशन सिस्टम की विफलता, किसी यात्री की अचानक तबियत खराब हो जाना या पायलट द्वारा हवाई जहाज का नियंत्रण खो देना.. इस तरह की आपात कालीन परिस्थितियों में मेडे कॉल किया जाता है।
