दीपावली की तैयारी तेज, मिट्टी के दीये बनाने में जुटे कुम्हार

कोरबा। दीपावली पर्व के लिए अब केवल एक पखवाड़े का समय शेष रह गया है। ऐसे में त्योहार को लेकर बाजारों में तैयारियां तेज होने लगी हैं। दीपावली पर घरों को रोशन करने वाले मिट्टी के दीयों और दीपमालिकाओं की मांग को देखते हुए प्रजापति समुदाय के कुम्हार इन्हें तैयार करने में जुट गए हैं।

कोरबा के सीतामढ़ी, मोतीसागरपारा सहित अन्य स्थानों पर पारंपरिक रूप से मिट्टी के दीये और दीप सज्जा की सामग्री बनाने का काम किया जा रहा है। कुम्हारों ने अपने काम की रफ्तार बढ़ा दी है, ताकि दीपावली से पहले पर्याप्त संख्या में दीये तैयार कर बाजार तक पहुंचाए जा सकें। इसके लिए मिट्टी को आकार देने, दीयों को सुखाने और उन्हें पकाने की प्रक्रिया लगातार जारी है।

दीपावली के पर्व में मिट्टी के दीयों का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों में दीप प्रज्वलित करने की परंपरा के चलते हर साल इस दौरान दीयों की मांग बढ़ जाती है। कुम्हारों ने बताया कि पर्व नजदीक आने के साथ ही उनके चाक की रफ्तार बढ़ गई है और परिवार के सदस्य भी इस काम में हाथ बंटा रहे हैं। समय पर अधिक से अधिक दीये तैयार करने के लिए दिनभर मेहनत करनी पड़ रही है।

उनका कहना है कि दीपावली का त्योहार उनके पारंपरिक व्यवसाय के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान होने वाली बिक्री से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद रहती है। वहीं, मिट्टी के दीयों का उपयोग स्थानीय कारीगरों की मेहनत और पारंपरिक हस्तकला को प्रोत्साहन देने के साथ ही त्योहार की पारंपरिक चमक को भी बनाए रखता है।

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