लाखों वाहनों को हर रोज बर्दाश्त कर रहीं सडक़ें, मजबूती पर उठते सवाल

अगर मोस्ट के मापदंडों से हो रहा निर्माण तो लगातार टूट-फूट क्यों?

कोरबा। मिनिस्ट्री ऑफ सरफेस ट्रांसपोर्ट द्वारा बनाए गए मानको के आधार पर सडक़ें तैयार करायी जाती है। सडक़ों की कैटेगरी के साथ ही उनकी भारवहन क्षमता तय होती है। इस आधार पर ही इन पर से होकर छोटी-बड़ी गाडिय़ां दौड़ती हैं। अकेले कोरबा जिले में पंजीकृत वाहनों का आंकड़ा पौने 4 हजार के आसपास पहुंच गया है। अन्य क्षेत्रों के वाहनों का दबाव भी इन सडक़ों पर आये दिन बना हुआ है। सडक़ों की टूट फूट के मामलों में जिम्मेदार होने वाले कारणों में वाहनों का दबाव भी सबसे बड़ा फैक्टर तो है ही।

जिले में डब्लूडीएम से लेकर पीएम सडक़, मुख्यमंत्री सडक़ विकास प्रोजेक्ट, नेशनल हाईवे जैसी सडक़ें मुख्य है। जबकि भारतमाला सडक़ निर्माणाधीन की स्थिति में है। इन सडक़ों के माध्यम से ना केवल सामान्य यात्री परिवहन को रफ्तार मिल रही है बल्कि अलग-अलग प्रकार के सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम आसान हो रहा है। मार्च 2026 की स्थिति में कोरबा जिले में सभी प्रकार के वाहनों के पंजीकरण का आंकड़ा 3 लाख 77 हजार था। वित्त वर्ष 2026-27 के शुरूआत के साथ प्रतिदिन वाहनों का पंजीकरण जारी है। यानी समय के साथ वाहनों के खरीदने के साथ पंजीकरण और उनके रोड पर उतरने और संचालन की व्यवस्था गतिशील है। कोरबा औद्योगिक जिले में अलग अलग प्रकार के भारी वाहनों की संख्या 11 हजार 685 बतायी गई है। इनमें साउथ ईस्टर्न कोलफील्डस लिमिटेड के चार क्षेत्रों में चलने वाली वजनी गाडिय़ों के अलावा ट्रेलर, जेसीबी, हाईड्र सहित दूसरे वाहन शामिल है।

जिले में लाईट व्कील्स की संख्या 2813 है जबकि विभिन्न रूट पर संचालित व स्कूलों से संबंधित बसों की संख्या 320 है। इतनी सारे वाहनों का बोझ प्रतिदिन जिले की सडक़ें बर्दाश्त कर रही है। इनके अतिरिक्त रोजाना अलग-अलग क्षेत्रों से होकर आना जाना करने वाले वाहन इससे अलग है। शायद सडक़ों की गुणवत्ता की कमजोरी कहना होगा कि चाहकर भी वे टेंडर शर्तों और मजबूती से संबंधित दावों के हिसाब से टिकाऊ साबित नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि हर साल डामर से लेकर कांक्रीट का उपयोग सडक़ों के मामले में हो रहा है और फिर बदसूरती की तस्वीर सामने आ रही है।


कितना टिकाऊ साबित होगा सुधार
कोरबा में सडक़ों के सुधार की अपनी एक परंपरा रही है। लगभग हर वर्ष इस तरह के नजारे आसपास के क्षेत्र में बड़ी आसानी से दिखाई देते हैं और इन पर भारी-भरकम रकम खर्च करने के लिए संभावनाएं भी हैं।

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