सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी से राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा भी संकट में

कोरबा 28 अगस्त। सड़क पर खुले घूमते मवेशी अब सिर्फ यातायात में बाधा नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। कोरबा जिले में हाल के दिनों में हुई घटनाएं इस समस्या की भयावह तस्वीर सामने ला रही हैं। सर्वमंगला-कनबेरी मार्ग पर भारी वाहन की चपेट में आने से दो मवेशियों की दर्दनाक मौत हो गई। इसी सड़क पर कुछ दिन पहले मवेशियों से टकराकर एक राहगीर गंभीर रूप से घायल हो चुका है।

दर्री रोड पर भी कुछ दिन पहले अज्ञात वाहन ने नौ मवेशियों को कुचल दिया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी केवल पशुओं के लिए ही नहीं, बल्कि वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी बड़ा जोखिम बन गई है। राष्ट्रीय और राजकीय सड़कों पर वाहनों की रफ्तार अधिक रहती है। ऐसे में सड़क के बीच बैठे या अचानक दौड़कर सामने आने वाले मवेशियों से बचने का समय वाहन चालकों को नहीं मिल पाता। रात और बारिश के दौरान खतरा और बढ़ जाता है। अचानक ब्रेक लगाने या मवेशी को बचाने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होकर दूसरे वाहन से टकरा सकते हैं। सड़क दुर्घटनाओं में मवेशियों की मौत के साथ वाहन सवारों की जान पर भी खतरा मंडराता है। दोपहिया वाहन चालक विशेष रूप से इसकी चपेट में आते हैं। एक ओर पशुपालकों को अपने मवेशी खोने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राहगीरों को चोट और वाहन क्षति का सामना करना पड़ सकता है। लगातार हो रहे हादसे यह संकेत दे रहे हैं कि सडक पर घूमता एक मवेशी केवल यातायात की रुकावट नहीं, बल्कि किसी भी समय एक बड़े हादसे की वजह बन सकता है।

सडकों से मवेशियों को हटाने के लिए केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय नियमित निगरानी और प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है। नगर निकाय, पशुपालन विभाग, पुलिस और सडक प्रबंधन एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ ऐसे स्थानों की पहचान करनी होगी, जहां मवेशी बार-बार सडकों पर पहुंचते हैं। पशुओं के मालिकों की जिम्मेदारी तय करने के साथ सुरक्षित पशु आश्रय और नियमित पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी हैं।

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