ईरान युद्ध पर मतभेद, ब्रिक्स का संयुक्त बयान नहीं हो सका जारी

नई दिल्ली. ब्रिक्स देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक पश्चिम एशिया के बढ़ते संकट पर साझा बयान जारी किए बिना खत्म हुई। सदस्य देशों के बीच संघर्ष को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण संयुक्त घोषणा पत्र जारी नहीं हो सका। ब्रिक्स के अध्यक्ष भारत ने ‘चेयर स्टेटमेंट’ जारी कर कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के अलग-अलग विचार है। सदस्य देशों ने अपने-अपने रुख रखे। संकट का जल्द समाधान निकालने, संवाद के महत्व, क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर जोर दिया गया।
मतभेद तब खुलकर सामने आए जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान पर हुए हमलों की निंदा करने की मांग की। अराघची ने यूएई का नाम लिए बिना कहा कि एक देश ने ब्रिक्स के संयुक्त बयान के कुछ हिस्सों को अवरुद्ध कर दिया है, जिसके इजराइल से विशेष संबंध है।
शांति में भारत निभाए। भूमिकाः अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति के लिए अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अराघची ने कहा कि युद्धविराम लागू है, लेकिन स्थिति नाजुक है। हमें अमरीकियों पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान ने होर्मुज से निकलने में भारतीय जहाजों की मदद भी की।
परमाणु प्रोग्राम 20 साल रोके ईरानः ट्रंप
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान से समझौता करने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने एक शर्त रख दी है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि अगर ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को 20 साल के लिए पूरी तरह रोकने का ठोस भरोसा दें, तो दोनों देशों के बीच एक नया समझौता हो सकता है। ईरान पहले ही कह चुका है कि इस प्रोग्राम पर बात नहीं होगी।
