अब अखबार में तला हुआ खाना परोसा तो जाना पड़ सकता है जेल

नई दिल्ली। देश में सड़क किनारे ठेलों से लेकर होटलों तक, खाने को अखबार में लपेटकर देने की आदत बदलने वाली है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इस पर रोक लगाते हुए कहा है कि ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है और जेल भी जाना पड़ सकता है।
अचानक यह मामला चर्चा में क्यों आया?
हाल ही में मुंबई में यह देखा गया कि एक मशहूर वड़ापाव विक्रेता ग्राहकों को अखबार में खाना पैक करके और परोस कर दे रहा था। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए, एफएसएसएआई के पश्चिमी क्षेत्र और बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की है। पूरे शहर और क्षेत्र में ऐसी अन्य घटनाओं की संभावना को देखते हुए, एफएसएसएआई ने सभी खाद्य विक्रेताओं से आग्रह किया है कि वे खाना पैक करने या परोसने के लिए अखबार का इस्तेमाल तुरंत बंद करें।
एफएसएसएआई के अनुसार, अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में कई हानिकारक रंग, पिगमेंट, बाइंडर और रसायन होते हैं। इसमें विशेष रूप से लेड और अन्य भारी धातुएं शामिल होती हैं। जब कोई गर्म या तेल वाला खाना इस प्रिंट के संपर्क में आता है, तो ये टॉक्सिन्स (जहरीले तत्व) सीधे खाने में मिल जाते हैं, जिससे गंभीर और पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, अखबारों के वितरण के दौरान वे अस्वच्छ परिस्थितियों से गुजरते हैं, जिससे वे बीमारियों का कारण बनने वाले रोगजनकों के वाहक बन जाते हैं।
एफएसएसएआई और राज्य के संबंधित प्राधिकरण मिलकर ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ और इसके नियमों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकार का मुख्य फोकस अब खाद्य और पेय (F&B) सेक्टर में सुरक्षित और टिकाऊ पैकेजिंग के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाना है।
अखबार में तला हुआ खाना परोसना भले ही पहली नजर में हानिरहित लगे, लेकिन इसके स्वास्थ्य जोखिम बहुत गंभीर हैं।एफ एस एस ए आई ने साफ निर्देश दिया है कि सभी खाद्य पदार्थ विक्रेता, उपभोक्ताओं की भलाई के लिए केवल सुरक्षित और स्वीकृत ‘फूड-ग्रेड’ पैकेजिंग सामग्री का ही उपयोग करें। इसके साथ ही, आम लोगों और उपभोक्ताओं से भी इस मामले में सतर्क रहने की अपील की गई है।
प्रतिबंध के मुख्य बिंदु और नियम: ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशन, 2018’ के तहत अखबारों या इसी तरह की अन्य मुद्रित सामग्री का उपयोग प्रतिबंधित है।
क्या है खतरा?: अखबारों की स्याही में मौजूद हानिकारक रसायन (Chemicals) भोजन में मिल जाते हैं, जिससे कैंसर और फेफड़ों-किडनी की गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
यह भी वर्जित: समोसे, पकौड़े या वड़ा पाव जैसे तले हुए खाद्य पदार्थों से अतिरिक्त तेल (Excess oil) सोखने के लिए भी अखबार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
मान्य विकल्प: केवल प्रमाणित और खाद्य-ग्रेड (Food-grade) पैकेजिंग सामग्री जैसे फूड-ग्रेड पेपर या उचित कंटेनरों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
फूड-ग्रेड पेपर का ही होगा इस्तेमाल
डॉक्टरों के अनुसार अखबार की स्याही में लेड जैसी भारी धातुएं व बायोएक्टिव रसायन होते हैं। ये गर्मी से खाने में मिल सकते हैं। इससे कैंसर और पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। एफएसएसएआई ने राज्यों को आदेश दिया है कि खाद्य पदार्थों की पैकिंग व परोसने के लिए फूड-ग्रेड पेपर या बटर पेपर जैसे फूड-ग्रेड पैकेजिंग मटेरियल का उपयोग हो।
