नई भाजपा: “कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा”

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा के 10 में से सात सांसदों का पार्टी छोड़ कर भाजपा संसदीय दल में विलय से सत्तारूढ़ दल ऊपरी सदन में सदस्य संख्या बढ़ कर 113 हो गई है। पार्टी सांसदों की संख्या में बढ़ोतरी से सत्ता समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा लेकिन भाजपा को राज्यसभा में महत्वपूर्ण विधेयक पारित करने में अन्य दलों पर निर्भरता जरूर कम होगी। पिछले कुछ वर्षों में अन्य दल के एक गुट का या पूरी पार्टी के विधायक/संसदीय दल के भाजपा में विलय का यह पहला उदाहरण नहीं है। इसकी लंबी फेहरिस्त है जिससे दूसरे दल टूटते गए और भाजपा की सरकारें और कुनबा बढ़ता गया।
जोड़तोड़ से कई राज्य में भाजपा सरकार
भारतीय जनता पार्टी कभी अपने सिद्धांतों के लिए जानी जाती थी, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर नरेंद्र मोदी के आसीन होने के बाद लक्ष्य हासिल करने के लिए साम दाम दंड भेद सभी नीतियों का भरपूर उपयोग किया जाने लगा है। यही वजह है कि अब भारतीय जनता पार्टी निकल नहीं रह गई है बल्कि उसमें मिलावट आ गई है और इस पर “कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा” की कहावत सटीक बैठने लगी है। इसके उदाहरण निम्न अनुसार है –
अरुणाचल प्रदेशः दिसम्बर 2016 में पेमा खांडू के नेतृत्व में पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल के 33 विधायक भाजपा में शामिल, भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनी
आंध्र प्रदेशः 2019 में तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) के 6 में से चार राज्यसभा सांसदों ने टीडीपी से इस्तीफा दे कर संसदीय दल का भाजपा संसदीय दल में विलय किया।
कर्नाटकः जुलाई 2019 में जनता दल (एस) के तीन व कांग्रेस के 13 विधायकों ने इस्तीफा देकर कांग्रेस-जेडीएस की कुमारस्वामी सरकार गिराई, बीएस येड्डियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी।
सिक्किम: अगस्त 2019 में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 10 विधायक भाजपा में शामिल हुए। पार्टी प्रमुख विपक्षी दल बनी।
मध्यप्रदेश: मार्च 2020 में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और 22 कांग्रेस विधायक इस्तीफे दे कर भाजपा में शामिल हुए। कमलनाथ सरकार गिरी, भाजपा की शिवराज सरकार बनी।
बिहार: 2021 में लोजपा के 6 में से 5 सांसदों ने पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व में चिराग पासवान से विद्रोह किया, एनडीए का हिस्सा बने।
मणिपुरः मार्च 2020 में कांग्रेस के 28 व भाजपा 21 विधायक होने के बावजूद टीएमसी के एक और कांग्रेस के छह विधायकों के भाजपा में शामिल कर सरकार बनाई।
गोवा: सितंबर 2022 में 11 में से 8 कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल, 40 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा की सदस्य संख्या 28 हुई।
महाराष्ट्रः शिवसेना और एनसीपी में बड़ी टूट, दोनों दल भाजपानीत एनडीए गठबंधन में शामिल हुए, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी।
