इंडिगो:हवाई संकट की ज़मीनी हकीकत © डॉ. सुधीर सक्सेना

इंडिगो:हवाई संकट की ज़मीनी हकीकत © डॉ. सुधीर सक्सेना

हवाई यात्रा के इतिहास में इतने बुरे दिन कभी नहीं गुजरे थे, जितने बीतते साल में आखिरी महिने के पहले हफ्ते में बीते | भारत में हवाई-परिवहन में अग्रणी इंडिगो ने इतनी बड़ी तादाद में घरेलू उड़ानें रद्द कीं कि कोहराम मच गया। हवाई अड्डों पर बस अड्डों से भी बदतर दृश्य देखने को मिले। अव्यवस्था, अफरातफरी, आक्रोश, शिकायतें, क्रंदन, गालीगलौज़, बेबसी और हताशा के मिलेजुले इतने बड़े पैमाने पर पहले कभी न देखे गये मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाले दृश्य सामने आये। सरकार की हिदायत के बाद इंडिगो के सीईओ पीटर्स ने रविवार को यात्रियों को 610 करोड़ रुपये और तीन हजार से अधिक बैग लौटाने का ऐलान किया, लेकिन आलम यह था कि रविवार को भी 650 उड़ानें रद्द हुईं। और इससे पहले शनिवार को 1500 उड़ाने रद्द होने की खबर थी। जाहिर है कि घरेलू नागरिक उड्डयन लगभग ठप्प था। फलतः खामियाजा उन लाखों मुसाफिरों ने भुगता, जो हवाई यात्रा को निरापद, सुविधाजनक और त्वरित मानकर वरियता देते थे। बदइंतजामी का आलम यह था कि दिल्ली से सोमवार आठ दिसंबर को दो सौ से भी ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हुई। इस बीच परिस्थितियों के मद्देनजर नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इंडिगो को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया l यही नहीं उसने किराये में अनापशनाप बढ़ोत्तरी की पेशगी रोकथाम के लिए ‘कैप’ की भी घोषणा की, जिसके तहत पांच सौ किमी तक ₹7500/-, पांच सौ से एक हजार किमी तक रुपये 12000/- और अधिकम ₹18,000/- की हद बांध दी।
जो कुछ हुआ उसे बिला शक अभूतपूर्व संकट की ही संज्ञा दी जायेगी। अनुमान है कि करीब तीन लाख हवाई यात्रियों को तीन दिनों तक बंधकों सा बेचारगी का तकलीफदेह वक्त बिताना पड़ा। गंतव्य तक पहुंच नहीं पाने से बड़ी संख्या में लोग इलाज, इंटरव्यू, परीक्षा और शादी-ब्याह के अवसरों से वंचित रहे। मोटे तौर पर यह संकट पायलटों की कमी से पैदा हुआ। माना जाता है कि इंडिगो-प्रबंधन की अदूरदर्शिता और लेतलाली के चलते यह विषम स्थिति उत्पन्न हुई। पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी. चिदंबरम का यह कथन समीचीन है कि पायलट ड्यूटी की नियमावलि सरकार ने जनवरी, 24 में जारी कर दी थी, लेकिन विमानन कंपनी ने 23 माह की लंबी अवधि में कोई तैयारी नहीं की। चिदंबरम ने तंज करते हुये कहा कि मोहलत की परवाह न करने पर जब लाखों यात्री फँसे तो सरकार ने हाथ खड़े कर दिये और उनकी कोई सुध नहीं ली।
इंडिगो द्वारा सैकड़ों उड़ानों को रद्द करने से अभूतपूर्व और विकराल संकट उत्पत्ति होने का प्रमुख कारण यह है कि भारत में नागरिक उड्डयन में संप्रति इंडिगो का वर्चस्व है। घरेलू मार्केट में उसकी भागीदारी 65 प्रतिशत है, जबकि एयर इंडिया तथा अन्य का शेयर क्रमश: 30 और पांच फीसद है। घरेलू उड्डयन में इंडिगो का एकाधिकार पिछली दहाई की देन है। सन 2014 के घरेलू उड़ानों के परिदृश्य की बात करें तो इंडिगो की भागीदारी तब मात्र 30 प्रतिशत थी। तब एयरइंडिया और स्पाइस जेट 18-18 प्रतिशत, गो एयर नौ फीसद, जेट एयरवेज 21 फीसद, एयर एशिया एक फीसद और अन्य तीन फीसद भागीदारी रखते थे, लेकिन बीते दशक में इंडिगो ने खूब छलांगें भरी और देखते ही देखते अन्य एयरलाइन्स को विस्थापित कर घरेलू आसमान पर कब्ज़ा कर लिया। फर्ज कीजिये कि घरेलू विमानन का परिदृश्य एक दहाई पहले जैसा होता तो यकीनन वैकल्पिक उड़ानों की उपलब्धता के चलते विमान यात्रियों की इतने बड़े संकट का सामना नहीं करना पड़ता। प्रसंगवश उल्लेखनीय है कि भारत में नागरिक विमानन का यथार्थ अमेरिका व विकसित राष्ट्रों से सर्वथा भिन्न है l अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस या अन्य यूरोपीय देशों में किसी निजी एयरलाइंस का शेयर औसतन 20 प्रतिशत से अधिक नहीं है।
इंडिगो निर्विवादतः आज भारत की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन है। यह प्रतिदिन करीब 2300 उड़ानें संचालित करती है। गत वर्ष लगभग 11.8 करोड़ यात्रियों ने इसमें उड़ान भरी थी l इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड का यह उपक्रम सफलता के मान से अग्रणी है। इसके संस्थापक राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल हैं तथा इसका मुख्यालय हरियाणा में गुरुग्राम में है। इसकी स्थापना सन् 2006 में हुई थी और इसने उसी वर्ष परिचालन भी प्रारंभ किया। कंपनी के 51 प्रतिशत स्टाक इंटरग्लोब और 48 प्रतिशत स्टाक गंगवाल की वर्जीनिया (यूएसए) स्थित कंपनी कैलम इंवेस्टमेंट्स के पास है। सन 2011 में इसे विदेशों में संचालन के लिए लाइसेंस मिला l इसने अंतर्राष्टृय विमानन सेवा की शुरुआत सितंबर 2011 में दुबई-दिल्ली उड़ान से की। उल्लेखनीय बात यह है कि इसने प्रारंभिक दौर में प्रतिस्पर्धा में किंगफिशर को विस्थापित करने में कामयाबी पाई। इंट‍रग्लोब के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और इंट‍रग्लोब एविएशन में प्रोमोटर तथा एमडी राहुल भाटिया के बिजनेस इंटरेस्ट ट्रैवल, होस्पिटैलिटि, लाजिस्टिक्स और टेक्नालाजी के इर्दगिर्द फैले हुए हैं। होस्पिटैलिटि में यह फ्रांसीसी दिग्गज एकार की सहयोगी है और दोनों भारत तथा विदेश में 30 से अधिक होटल संचालित करते हैं। इंडिगो गुरुग्राम में अपने कार्पोरेट दफ्तर के समीप एक रेस्त्रां भी चलाती है। राडार बॉक्स के मुताबिक आज इंडिगो विश्व में छठवीं व्यस्ततम एयर सेवा है।
राहुल भाटिया और उनके उपक्रमों का नाम इलेक्टोरल-बॉन्ड्स से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने चार राजनीतिक दलों को 56 करोड़ रुपयों का बड़ा डोनेशन दिया था। उनके चंदे का बड़ा हिस्सा यानि करीब 31 करोड़ रुपये भारतीय जनता पार्टी के खाते में गये। तृणमूल कांग्रेस को 16.2 करोड़ रुपये, कांग्रेस को 5 करोड़ रुपये और एनसीपी को 3.8 करोड़ रुपये मिले। राहुल भाटिया ने स्वयं भी बीस करोड़ रुपये के बाँड खरीदे थे। सहज ही सम‌झा जा सकता है कि उन्होंने सर्वाधिक किसको उपकृत किया? यह ज्ञात तथ्य है कि बॉन्डस वित्तीय और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हैं और इनसे कारोबार में नफा-नुकसान तय होता है l
इस बीच इस आशय की खबर आई है कि इंडिगो-संकट जान-बूझकर पैदा किया गया है। इंडिगो के पास 4551 पायलट हैं l सिर्फ 124 पायलटों की कमी है। अत: 2200 में से केवल 5 से 7 प्रतिशत उड़ानें प्रभावित होनी थी, लेकिन षड्यंत्रपूर्वक बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसल की गयी। यदि ऐसा है तो संकट प्राकृतिक नहीं, इंजीनियर्ड था। यानि प्राफिट को तरजीह दी गयी। एयर- लाइन पायलट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सैम थॉमस का कहना है कि मुनाफे को सुरक्षा के ऊपर रखा जा रहा है। दो साल पहले घोषित नियमों को वापस करवाने के लिये इंडिगो ने इतना बड़ा खेल खेला। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, आपराधिक कृत्य है।
एक और सन्दर्भ जो इंडिगो-संकट के परिप्रेक्ष्य में उभर कर सामने आया है, यह है कि नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 8 अक्टूबर, 25 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है और 25 दिसंबर से इंडिगो की नयी उड़ान सेवाओं के साथ यह उड़ान सेवाओं के लिए खुल जाएगा l लेकिन इस बीच इंडिगो की संकट से सारा गुड़ गोबर हो गया और मुमकिन है कि यह ऐलान टल जाए। इस बीच वैश्विक कारबार में धूमकेतु की तरह उभरे गौतम अदाणी उडडयन के क्षेत्र में एंट्री कर चुके हैं। अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स, लिमिटेड (एएएचएल) की स्थापना सन 2019 में हो चुकी है। अदानी ग्रुप ने अपना पहला कदम हवाई अड्डों में रखा है। उसने छह हवाई अड्डों-अहमद‌ाबाद, लखनऊ, विशाखापतनम, मंगलूरू, जयपुर और गुवाहाटी स्थित हवाई अड्डों के संचालन, प्रबंधन और विकास का जिम्मा लिया है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ उसका एतद् विषयक समझौता हो चुका है।
इंडिगो के जरिए उपजे संकट ने लोकसभा में प्रतिपक्ष राहुल गांधी की चेतावनी को भी जेरे-बहस ला दिया है। राहुल ने तेरह माह पूर्व ‘इंडियन एक्स्प्रेस’ में इस बारे में लेख लिखा था। ‘मैच फिक्सिंग एकाधिकार बनाम निष्पक्ष व्यापार : डर पर स्वतंत्रता को चुनने का समय’ शीर्षक लेख में उन्होंने आर्थिक एकाधिकार और उसके खतरों की ओर संकेत किया था। वक्त की कसौटी पर उनकी चेतावनी खरी उतरी। इंडिगो – संकट ने आशंकाओं का कद बढ़ा दिया है। यह लांछन अपनी जगह है कि सरकार ने हवाई यात्रियों के हितों की रक्षा नहीं की l वरिष्ठ पत्रकार पुष्परंजन प्रश्न करते हैं कि आपदा प्रबंधन से एयरफोर्स का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया, जबकि उसके पास सी 17 ग्लोबमास्टर और सी 130 सुपर हरकुलस हेलीकाप्टरों समेत छह बोइंग 737 का बेड़ा मौजूद है। इस बीच एक बड़ी और दूरगामी महत्त्व की घटना यह घटी है कि अदानी समूह ने 820 करोड़ रुपयों में फ्लाइट ट्रेनिंग कंपनी फ्लाइट स्टीमुलेशन टेक्नीक सेंटर प्राइवेट लिमिटेड (एफएसटी) खरीद ली है। आगामी समय में हवाई यातायात बढ़ेगा और नया हवाई बेड़ा भी जुड़ेगा l अनुमान है कि 1500 से अधिक एयरक्राफ्ट हवाई परिदृश्य में पदार्पण करेंगे। जाहिर है कि उन्हें उड़ाने के लिए कुशल पायलट चाहिए और एफएसटी पायलटों के प्रशिक्षण की सबसे बड़ी इकाई है। तो क्या इंडिगो-संकट एक नये बदलाव की पूर्वपीठिका साबित होगा?

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