दो महीनों के भीतर नौ देशों में एक दर्जन से अधिक रिफायनरी में लगी आग, किसी साजिश की आशंका

नई दिल्ली. राजस्थान के पचपदरा में 20 अप्रैल को रिफाइनरी में लगी आग को शुरुआती तौर पर सामान्य घटना माना जा रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसी तरह की घटनाओं की श्रृंखला ने सवाल खड़े किए हैं। पिछले दो महीनों के भीतर नौ देशों में एक दर्जन से अधिक घटनाएं सामने आई हैं जहां तेल या उससे जुड़े संयंत्रों में आग लगी। एक तरफ क्रूड आयल की घेराबंदी, रिफाइनरियों में हो रही घटनाएं और दूसरी तरफ स्टोरेज फैसिलिटी में लग रही आग यह साफ बता रही है कि सब कुछ सामान्य नहीं है।’
अमरीका-इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था। इसके ठीक बाद 1 मार्च को इक्वाडोर की सबसे बड़ी रिफाइनरी में आग लग गई। मैक्सिको की सबसे बड़ी रिफाइनरी 17 मार्च को आग लगी और इसमें पांच लोगों की मौत भी हो गई। यह क्रम भारत तक आ पहुंचा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे, लेकिन एक दिन पहले 20 अप्रैल को इस रिफाइनरी में आग लग गई। इसके बाद प्रधानमंत्री का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया। संबंधित एजेंसियां आग लगने की इस घटना की जांच में जुटी हुई है और तकनीकी व सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
घटनाएं सामान्य नहीं
एक रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि आप अगर देखें तो ऊर्जा क्षेत्र में हो रही यह घटनाएं रिफाइनरियों के अलावा पावर सेक्टर में भी हो रही हैं। ऐसे में जब भारत सहित दुनिया को सबसे ज्यादा ऊर्जा की जरूरत है। ऐसे में इन घटनाओं को सामान्य नहीं समझा जाना चाहिए। पावर और ऑयल सेक्टर दोनों को देखें तो पिछले 50 दिनों में 50 से अधिक घटनाएं दुनियाभर में हुई हैं।
भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद कहते हैं, ‘एक दो घटनाएं होती तो इसे इत्तेफाक कहा जा सकता है लेकिन जिस तरह का सिलसिला है। इससे यही लगता है कि कोई तो है जो ऑयल रिफाइनिंग को प्रभावित चाहता है। वह कौन हो सकता है? इसका आंकलन आप लगाइए। अमरीका नहीं चाहता है कि भारत आत्मनिर्भर बने। पिछले दिनों तो अमरीकी उप विदेश मंत्री ने भी यही कहा था कि वह चीन वाली गलती भारत के साथ नहीं दोहराएंगे।’
