नगर निगम कोरबा के दो यंत्री हो गए रिश्वतखोरी के आरोप से बरी, अभियोजन पक्ष को लगा झटका

कोरबा। कोरबा के एक स्पेशल कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में नगर निगम में सहायक अभियंता धर्मचंद्र सोनकर और प्रभारी उप अभियंता देवेंद्र स्वर्णकार को रिश्वतखोरी के आरोप से बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष रिश्वत के आरोपों को कोर्ट में प्रमाणित करने में नाकाम रहा। कोर्ट के इस फैसले से अभियोजन पक्ष को बड़ा झटका लगा है।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने ठेकेदार मनकराम साहू के बिल को पास करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में देवेंद्र स्वर्णकार और धर्मचंद्र सोनकर को गिरफ्तार किया था। दोनों के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने 18 जून 2024 को गिरफ्तार कर लिया था। पकड़े गए धर्मचंद्र सोनकर और देवेंद्र स्वर्णकार को जेल भेज दिया था। उस समय सोनकर दर्री जोन में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थे जबकिं स्वर्णकार प्रभारी उप अभियंता का दायित्व दर्री जोन में निभा रहे थे। ठेकेदार मनक साहू ने एंटी करप्शन ब्यूरो में 5 जून 2024 को शिकायत की थी, इसमें आरोप लगाया गया था कि वह ठेकेदारी का कार्य करता है। दो वर्ष की अवधि में उसने नगर निगम के विभिन्न वाडों में कार्य किया है। वार्ड क्रमांक 53, वार्ड क्रमांक 51 और वार्ड क्रमांक 45 में मनकराम के द्वारा मरम्मत, संधारण, पार्षद मद के कार्य, 5 विधायक मद और महापौर मद से कार्य किए गए हैं। इसके बदले नगर निगम से कोरबा मनकराम को 21 लाख रुपए का बिल प्राप्त होना था। इसके अलावा मनकराम ने निगम के वार्ड क्रमांक 51 में उद्यान कार्य और 53 में सीसी रोड, आरसीसी नाली, अहाता का भी कार्य किया था। मनक राम ने सहायक अभियंता सोनकर पर आरोप लगाया था कि कार्य के बदले पूर्व में किए गए भुगतान पर सोनकर की ओर से दो फीसदी र्कमीशन मांगा गया था, जो 21 लाख रुपए का 42 हजार रुपए होता है। वह सोनकर को रिश्वत नहीं देना चाहता था इसलिए उसने इस मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो कार्यालय बिलासपुर को किया था। इस मामले की सुनवाई कोरबा के स्पेशल कोर्ट में चल रही थी।
न्यायाधीश गरिमा शर्मा की अदालत ने गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष की ओर से दिए गए दस्तावेजों के – आधार पर आरोप प्रमाणित होना नहीं बापाया। दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
