भू-विस्थापित व मजदूरों ने लिया आंदोलन का निर्णय

कोयलाधानी भू-विस्थापित किसान संघ के नेतृत्व में खोलेंगे मोर्चा
कोरबा । एसईसीएल गेवरा खदान प्रभावित क्षेत्र ग्राम विजयनगर सामुदायिक भवन के पास कोयलाधानी भू-विस्थापित किसान संघ के बैनर तले एक बैठक का आयोजन किया गया। संगठन के अध्यक्ष गजेंद्र पाल सिंह तंवर की अध्यक्षता में यह बैठक हुई। जिसमें क्षेत्र से बड़ी संख्या में भू-विस्थापित व मजदूर शामिल हुए।
संगठन के अनुसार भू-विस्थापितों व ग्रामीणों ने जूनाडीह खुसरूडीह में गेवरा खदान के लिए अपनी जमीन दी हैं। कुछ लोगों को नौकरी मिली है,लेकिन अधिकांश किसान व छोटे खातेदार हैं। जिनके समक्ष रोजगार का संकट बना हुआ है। वर्तमान में गेवरा में कई आउटसोर्सिंग कंपनियां नियोजित है। इसके बाद भी एसईसीएल प्रभावित परिवार के लोग रोजगार से वंचित है। पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ लोगों को रोजगार मिला भी है तो उन्हें सही तरीके से वेतन भुगतान नहीं हो रहा है।
खदान में कार्यरत मजदूरों को एचपीसी दर से मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा। इसे लेकर बैठक में उपस्थित सभी भू-विस्थापित व मजदूरों ने कोयलाधानी भू-विस्थापित किसान संघ के साथ आंदोलन का निर्णय लिया है। गेवरा क्षेत्र में नियोजित नए कंपनियों में कोयला धानी भू-विस्थापित किसान संघ के माध्यम से कंपनी में खदान प्रभावित बेरोजगारों को ड्राइवर, ऑपरेटर, हेल्पर, मैकेनिक सुपर वाइजर पदों पर भर्ती की मांग रखी है और इसे लेकर भू-विस्थापित संगठन के अध्यक्ष गजेंद्र पाल सिंह तंवर के नेतृत्व में महाप्रबंधक गेवरा क्षेत्र को ज्ञापन सौंपने का संकल्प लिया। गांव के वास्तविक भू-विस्थापितों को उनके अर्जित जमीन के लिए भूविस्थापित प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया कराने की भी मांग की गई है। संगठन ने कहा कि अगर भू-स्थापितों के वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने प्रबंधन गंभीरता नहीं दिखाएगा तो आगे बड़ा आंदोलन हो सकता है। गांव के वास्तविक भू-विस्थापितों को उनके अर्जित जमीन के लिए भू-विस्थापित प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की भी मांग करी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भू-विस्थापित विस्थापित और अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
जिसमें प्रमुख रूप से विजय चौहान, प्रकाश नारायण, राजेश कुमार, राकेश कुमार, कार्तिक कुमार, शिव सिंह, दीपक कंवर, दिलीप कंवर, मनोज निर्मलकर, मायाराम निर्मलकर, अर्जुन साय, किरण कुमार सहित विजयनगर, बेल टीकरी, बिंझरी, नरईबोध के खदान प्रभावित ग्रामीण भी शामिल रहे।
