भारतीय सेना को पहले स्वदेशी घूमकर हमला करने वाला हथियार मिला, दुश्मन का बचना नामुमकिन

नई दिल्ली. भारतीय सेना को पहले स्वदेशी ‘लॉइटरिंग म्यूनिशन’ (घूमकर हमला करने वाला हथियार) नागस्त्र-1आर की पहली खेप मिल गई है। पिछले साल नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) को 480 नागस्त्र-1आर का ऑर्डर दिया गया था। पहली खेप में ऐसे 120 हथियार शामिल हैं। यह दुश्मन पर नजर रखने के साथ उसे हवा में ही खोजकर तबाह करने में सक्षम है।

यह सिस्टम पूरी तरह देश में बना है। इसमें 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इसमें कई सेंसर लगे हैं। इससे रात में भी ऑपरेशन संभव है। यह हवा में घात लगाकर हमला करता है। दुश्मन के इलाके में पहुंचने के बाद यह लक्ष्य के ऊपर हवा में मंडराता है और मौका मिलते ही सटीक निशाना लगाकर दुश्मन को खत्म कर सकता है। अगर हमला रद्द करना हो तो इसे वापस बुलाया जा सकता है। यानी यह दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

4,500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई तक उड़ान

नागस्त्र-1 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार से बच निकलता है। यह 4,500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई तक उड़ सकता है। इस इलेक्ट्रिक यूएवी की ‘मैन-इन-लूप’ रेंज 15 किलोमीटर है। ऑटोनोमस मोड में इसे 30. किलोमीटर तक ऑपरेट किया जा सकता है। यह 60 मिनट लगातार. हवा में रह सकता है। यानी यह एक घंटे तक दुश्मन के इलाके में मंडरा सकता है। नागस्त्र-1 जीपीएस आधारित तकनीक से लैस है।

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