एक है अटाकामा @ डॉ. सुधीर सक्सेना

एक है अटाकामा
• डॉ. सुधीर सक्सेना
‘अ’ से अटाकामा। हम चाहें तो ऐसा कह सकते हैं। कारण यह कि अटाकामा अनूठा है, अद्वितीय है। दुनिया में अटाकामा जैसा कुछ और नहीं। अटाकामा को जानने के लिये अटाकामा को जानना जरूरी है। कहाँ है यह अटाकामा? वह क्या वजहें हैं, जो अटाकामा को बरबस अलग पायदान पर खड़ी कर देती है? अटाकामा में ऐसा क्या है कि अटाकामा विलक्षण है? वे कौन से घटक हैं, जिन्होंने अटाकामा का दृश्यविधान रचा है?
अटाकामा पृथ्वी पर सबसे शुष्क गैरध्रुवीय रेगिस्तान है। यह मरुभूमि है। धरती पर एक महाद्वीप है दक्षिण अमेरिका जिसे हम लातिनी अमेरिका के तौर पर संबोधित करते हैं। इसी महाद्वीप में एक देश है चिली। महान कवि पाब्लोनेरूदा और गैब्रिएला मिस्त्राल का चिली। फुटबाल के लिए दीवानगी का चिली। वही चिली जो सालमन मछलियों और उम्दा वाइन के लिये मशहूर है। वही चिली, जहां जर्मनी के बाद ब्रेड की सर्वाधिक खपत है। वही चिली, जिसने बीती शती में सन 1970 की दहाई में तानाशाह पिनोशे की बदौलत दुनिया भर के अखबारों में सुर्खियां बटोरी थीं। वही चिली जहां तांबे और लिथियम के विशाल भंडार है और जिनपर बहु-राष्ट्रीय निगमों की गिद्धदृष्टि है, और जहाँ मानवाधिकार कार्यकर्ता पानी की लड़ाई लड़ रहे हैं।
सन 1540 से सन 1818 तक स्पेन के उपनिवेश रहे चिली की तीन विशेषतायें हैं: पहाड़, रेगिस्तान और ग्लेशियर। इन तीनों का समुच्चय चिली को अलग पहचान और छटा देता है। इसी चिली के पश्चिम-उत्तर में स्थित अटाकामा दुनिया का सबसे सूखा रेगिस्तान है। उसकी एक और विशेषता है कि यह अंटार्कटिका के सबसे करीब है। बहरहाल, बात अटाकामा की तो अटाकामा एंडीज पर्वतमाला के पश्चिम में करीब 1600 किमी लंबी संकरी भूमि की पट्टी में फैला हुआ है। इस शुष्क मरूभूमि की प्रकृति का आभास इससे हो सकता है कि सन 1570 से सन 1971 यानि चार सौ वर्षों के अंतराल में यहाँ वर्षा नहीं हुई है। अटाकामा इतना शुष्क है कि छह हजार मीटर यानि लगभग 20 हजार फुट ऊंचे होकर भी कई पहाड़ पूरी तरह ग्लेशियरों या हिम-पर्तों से मुक्त हैं। केवल ओजोस डेल सलाडा, मोंटे, पिसिस और लुल्लाइलको जैसी चोटियां थोड़ी बहुत हिमाच्छादित हैं। डेसिएर्टो डे अटाकामा यानि अटाकामा के मरू में वर्षा का सालाना औसत 15 मिलीमीटर है। आप कह सकते हैं कि अटाकामा अनावृष्टि का उदाहरण है। करीब 20 करोड़ साल प्राचीन इस मरूथल को कैलीफोर्निया स्थित ‘वैलीऑफ डेथ’ से 50 गुना अधिक शुष्क बताया जाता है। इस मरू का कुल क्षेत्रफल 40600 वर्गमील अर्थात करीब 105000 वर्गकिमी है और उसका अधिकांश भाग नमक-बेसिनों (सलारेस यानि नमक के कछारों) रेत और बहते लावे से बना है। अटाकामा वासियों के लिये बारिश अजनबी है और एंटोफगास्ता, कलामा और कोपियापो जैसे शहरों के बाशिंदे बारिश के लुत्फ से वंचित है। जन 1991 में एंटोफगासता और तल्ताई समेत कुछ भागों में असामान्य वर्षा हुई थी, फलत: क्रमिक दलदल से 91 लोगों की जानें गयीं। ऐसे ही सन 2012 में शीत में सान पेड्रो डि अटाकामा में बाढ़ की नौबत आ गयी थी। इसी तरह 25 मार्च, 2015 को अटाकामा के दक्षिणी भाग में भारी वर्षा हुई। नतीजे में कोपियापो, टियेरा अमारिला, चानारल और डियेगो डी अल्माग्रो में कीच प्रवाह ने सौ से अधिक जाने ले लीं। एडीज पर्वत के पश्चिम में पतली लंबी पट्टी पर फैला यह रेगिस्तान 41000 वर्गमील क्षेत्र समेटता है, जो एंडीज की बंजर निचली ढलानों में शामिल करने पर बढ़कर 49000 वर्गमील यानि 128000 वर्ग किमी हो जाता है।

आलेख: डॉ. सुधीर सक्सेना


अटाकामा में ईसा पूर्व 7000 से 1500 ईस्वी तक चिंचोरो सभ्यता फली-फूली। प्रशांत तटीय क्षेत्रों में बसी बस्तियों में आजीविका का प्रमुख साधन मत्स्याखेट था। आश्चर्यजनक तौर पर यहां ममी प्रथा मिस्र के पूर्व भी प्रचलित थी और मृत्यु उपरांत अनुष्ठानों का विशेष महत्व था। बहरहाल, तटीय नगरों का विकास स्पेनी औपनिवेशिक- काल में हुआ। इन पत्तनों से यहां निकाली गयी चांदी का प्रमुखतः निर्यात होता था। सान पेड्रो डि अटाकामा, जो एक कस्बे सरीखा है, में पहले चर्च का निर्माण स्पनियों के आधिपत्य के बाद सन 1577 में हुआ। यह इलाका तांबा, चांदी और शोरे से समृद्ध है और यही इसकी समृद्धि और चिली, बोलीविया और पेरू में संघर्ष का सबब रहा है। जर्मनी में संश्लेषित नाइट्रेट के आविष्कार के बाद चिली के साल्टपीटर या शोरे की अहमियत खत्म हो गयी और खदानें बंद करनी पड़ीं। आज भी इस मरू में लगभग 170 परित्यक्त्त खदानें हैं, जहां कभी शोरा निकाला और निर्यात किया जाता था। तांबे और चांदी के पश्चात लिथियम की बड़ी भंडार मिलने से यह रेगिस्तान बड़ी कंपनियों की निगाह में है और चिली की सरकार उन पर मेहरबान है।
अटाकामा की कुल आबादी की आधी से अधिक दो शहरों कोपियापो और वेलेनार में बसती है। सन 2017 की जनगणना के अनुसार अटाकामा की आबादी 286168 है, इसमें कोपियायो में 125983, वालेनार में 43750 काल्डेरा में 12776, चनारल में 12086, अल साल्वाडोर में 8697 और टिएरा अमेरिला में 8578 लोग रहते हैं। डिएगो डि अल्माग्रो की जनसंख्या सिर्फ 7951 है। सन 1832 में जुआन गोडॉम द्वारा चानार्सिल्लो में चांदी की खानो की खोज के बाद इलाके में आव्रजन में तेजी आई। तांबे और चांदी के अलावा यहां लोहे और सोने के भी भंडार है तथा इसकी ताजा कड़ी है कीमती लिथियम। जलवायु के कारण यहां फल जल्दी पक जाते हैं और अब ये फल निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि चिली सेकेंड हैंड कपड़ों का सबसे बड़ा बाजार है और बड़ी तादाद में पुराने धुराने कपड़े अटाकामा में डंप किए जाते हैं। हालत यह है कि अटाकामा फास्ट फैशन की कब्रगाह कहलाती है। यह आज त्याज्य कपड़ों का डंपिंग ग्राउंड है। मुक्त शुल्क के कारण चिली में 44 मिलियन टन से अधिक कपड़े सालाना आते हैं और इनमें छंटे हुए कपड़ों के निर्यात के बाद शेष को अटाकामा में खपा दिया जाता है। ये वहां बरसों पड़े रहते हैं ओर सड़ांध उत्पन्न करते हैं। कभी कभी कपड़ों की इन ढेरियों में आग लगा दी जाती है, जिससे अटाकामा की हवा जहरीली होती है। अटाकामा में डंप किये गये कपड़ों के ऊँचे ढेर देखे जा सकते हैं। इन कपड़ों पर नामगिरामी कंपनियों के टैग लगे होते हैं। इनका वजन 10 हजार से 60 हजार टन तक कूता गया है।
अटाकामा के साथ एक और दिलचस्प संदर्भ नत्थी है। अटाकामा और मंगल ग्रह की परिस्थितियों में साम्य के चलते इसे मंगल अभियान सिमुलेशन के लिये प्रयोग स्थल के तौर पर प्रयुक्त किया जाता है। इसी साम्य के फलस्वरूप सन 2004 में टीवी श्रंखला स्पेस ओडिसी : वॉयेज टु द प्लैनेट्स की शूटिंग अटाकामा में हुई थी। अटाकामा का शुष्कतम क्षेत्र एंडीज और चिली कोस्ट के दरम्यां स्थित है, जहां प्रशांत या एटलांटिक से नमी का संवहन नहीं हो पाता है।
विषम परिस्थितियों के बावजूद यहां वनस्पतियों की समृद्ध विविधता विकसित हुई है। इसकी परिधि में 500 से अधिक प्रजातियां हैं। इनमें जड़ी बूटियां और फूल शामिल है। इनमें लारेटा नामक काष्ठ प्रजाति प्रमुख है। कुछ लारेटा तो 3000 साल से भी अधिक पुराने है। निःसृत राल के कारण अंधाधुंध खनन ने इसे लुप्तप्राय की कोटि में ला दिया। यहां रेत के रंग के टिड्डे पाये जाते हैं। भृंग और उनके लार्वा स्थानीय मेनू का हिस्सा है। यहां लाल बिच्छू भी होते हैं और रेगिस्तानी ततैया और तितलियां और छिपकलियां भी, अलबत्ता यह तटीय क्षेत्र पेंग्विनों से आबाद है। लुप्त प्राय चिली वुड स्टार और अनुकूलित डार्विन का पत्ती कान वाला चूहा भी यहां पाया जाता है। यहां फर सीलों और समुद्री शेरों को भी देखा जा सकता है।
अटाकामा खगोलीय प्रेक्षण के लिए आदर्श स्थान है। साल में दो सौ से अधिक रातों के निरअ या बादल रहित होने से तारों के अध्ययन के लिये यह आदर्श है। इसी से, यहाँ दूरबीनों का अंबार नजर आता है। आप शायद यकीन न करें, लेकिन अटाकामा चिली के तीन अग्रणी पर्यटन आकर्षणों में एक है। अधिकांश सैलानी सान पेड्रो में ठहरते हैं। यहां की बहुरंगी चाक्षुष दृश्यावलि वाकई आकर्षक है। अटाकामा में होना एक अपूर्व व विलक्षण अनुभव से गुजरना है। यदि आप मून वैली, सुंदर लेगूनों और बैंगनी सूर्यास्त का एक संग आनंद लेना चाहते हैं, तो उसके लिये एक ही ठौर है अटाकामा। अटाकामा और सिर्फ अटाकामा।
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