ईरान में 134 साल पुराना विष्णु मंदिर… आज भी प्रतिमाएं हैं यहां

मुंबई। बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ईरान में मौजूद प्राचीन हिंदू मंदिर बंदर अब्बास विष्णु मंदिर का एक वीडियो साझा किया। इसके बाद से यह मंदिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
अमिताभ बच्चन ने पोस्ट में बताया कि यह मंदिर 1892 में कजार शासनकाल के दौरान उन भारतीय हिंदू व्यापारियों के लिए बनाया गया था, जो उस समय बंदर अब्बास शहर में काम करते थे। खास बात यह है कि यह शहर अब चर्चा में छाए होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है। इतिहासकारों के मुताबिक, इसे मोहम्मद हसन साद-ओल-मलेक के शासन के दौरान बनवाया गया था।

मंदिर का एक कमरा बना संग्रहालयः 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में बड़ी संख्या में हिंदुओं को देश छोड़ना पड़ा। इसका असर मंदिर पर भी पड़ा, जहां कई पेंटिंग्स और कलाकृतियां नष्ट हो गई। मंदिर में आज भी भगवान विष्णु और बुद्ध की प्रतिमाएं हैं। मंदिर से जुड़ा एक कमरा अब छोटे संग्रहालय के रूप में इस्तेमाल होता है, जहां भगवान शिव के नटराज रूप की पुरानी प्रतिमा समेत कई ऐतिहासिक वस्तुएं रखी गई हैं।
चार साल में हुआ था इसका निर्माण
19वीं और 20वीं सदी के ईरानी इतिहासकार मोहम्मद अली सादिद अल-सल्तनेह ने अपनी एक रचना में उल्लेख किया था कि ब्रिटिश भारतीय कंपनी से जुड़े भारतीय व्यापारियों ने 1888 में मंदिर का निर्माण शुरू कराया था। इसे पूरा होने में चार साल लगे। मंदिर सिर्फ भगवान विष्णु को समर्पित धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह भारत-ईरान के पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्तों का प्रतीक भी माना जाता है।

कमल की आकृतियां, ईरानी कला का मिश्रण
मंदिर की वास्तुकला भी काफी अनोखी है। इसका मुख्य कक्ष प्याज के आकार के गुंबद से ढका हुआ है है, जिस पर कमल की आकृतियां उकेरी गई हैं। यह शैली भारतीय और ईरानी स्थापत्य कला का मिश्रण मानी जाती है। मंदिर के निर्माण में चूना, मिट्टी, कोरल पत्थर और गारे का इस्तेमाल किया गया था। मंदिर के भीतर छोटे-छोटे कक्ष पुजारियों और साधुओं के रहने के लिए बनाए गए थे। छत तक जाने वाली घुमावदार सीढ़ियां पारंपरिक ईरानी वास्तुकला की झलक देती हैं।
