धान खरीदी में ईमानदारी और पारदर्शिता की मिसाल बना जांजगीर-चांपा जिला

घनश्याम तिवारी और रामप्रकाश केशरवानी ने दी बधाई, कहा – सहकारिता की सच्ची भावना को साकार किया
सहकारी समितियों के समर्पण को सहकार भारती ने सराहा
जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 की धान खरीदी प्रक्रिया में जांजगीर-चांपा जिला ने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। 129 उपार्जन केन्द्रों और उनसे जुड़ी सहकारी समितियों ने जिस दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य किया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्पद बन गया है।
जिले में 6,32,793 टन धान की खरीदी सुनिश्चित किया गया। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि सभी 129 केंद्रों का लेखा मिलान शत-प्रतिशत पूरा हुआ। किसी भी केंद्र पर शॉर्टेज या अनियमितता की कोई शिकायत नहीं मिली, जो सहकारी व्यवस्था की सफलता का परिचायक है।
सहकार भारती का अभिनंदन
इस सराहनीय उपलब्धि पर सहकार भारती छत्तीसगढ़ के पैक्स प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री घनश्याम तिवारी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री रामप्रकाश केशरवानी ने जिले की समस्त सहकारी समितियों, उनके प्रबंधकों, केंद्र प्रभारी, ऑपरेटरों और अन्य सहयोगियों को हार्दिक बधाई एवं साधुवाद प्रेषित किया है।
घनश्याम तिवारी ने कहा, “जांजगीर-चांपा की सहकारी समितियों ने यह साबित कर दिया कि जब गांव का नेतृत्व अपने जिम्मेदारी को सेवा मानकर निभाता है, तब सहकारिता जनविश्वास का सबसे मजबूत स्तंभ बन जाती है। 129 केंद्रों का लेखा मिलान बिना किसी आपत्ति के पूर्ण होना अद्वितीय है। यह केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि नैतिक अनुशासन और ईमानदारी की जीत है।”
रामप्रकाश केशरवानी ने अपने वक्तव्य में कहा, “हमारी सहकारी समितियों के पदाधिकारी और कर्मचारी न केवल किसान भाइयों की मेहनत का सम्मान कर रहे हैं, बल्कि शासन और समाज के बीच एक विश्वसनीय सेतु का कार्य कर रहे हैं। यह सफलता सहकारी आंदोलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और स्वाभिमान का प्रतीक है।”
सहकारी समितियों की प्रमुख भूमिका
इस वर्ष खरीदी प्रक्रिया के हर चरण में समितियों ने कृषि उपज के न्यायपूर्ण मूल्य, माप-तौल की पारदर्शिता, समय पर निकासी और संग्रहण में अनुशासन दिखाया। शत-प्रतिशत लेखा मिलान दर्शाता है कि ग्राम स्तरीय समितियों ने स्वयं को मजबूत, उत्तरदायी और किसानों के हित में समर्पित रखा।
इस पूरे अभियान में किसी भी बाह्य एजेंसी या विभागीय हस्तक्षेप के बिना, सहकारी व्यवस्था के ही माध्यम से पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न किया गया। यह बात अपने-आप में छत्तीसगढ़ के सहकारिता मॉडल की आत्मनिर्भरता और क्षमता को सिद्ध करती है।
आदर्श सहकारी मॉडल बना जांजगीर-चांपा
सहकार भारती ने यह भी कहा कि जांजगीर-चांपा अब छत्तीसगढ़ का “आदर्श सहकारी जिला” बन गया है। राज्य के अन्य जिलों को यहां की समितियों की कार्यशैली, जवाबदेही और किसानों के प्रति सेवा-भाव से सीख लेनी चाहिए।
भविष्य की दिशा
सहकार भारती के अनुसार, यह सफलता केवल वर्तमान की नहीं, बल्कि भविष्य की राह दिखाती है। यदि राज्यभर में सभी सहकारी समितियाँ इसी तरह कार्य करें, तो छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन एक “ग्रामोन्मुखी आर्थिक क्रांति” का माध्यम बन सकता है।
