सरहौल बार्डर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस में झड़प, बैरिकेड तोडक़र निकालीं बसें

गुरूग्राम, 02 नवंबर । दिल्ली में आयोजित महारैली में जा रहे गुरुग्राम के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच रविवार को सरहौल बार्डर पर जमकर झड़प हो गई।कांग्रेस का आरोप है कि ग्रेप-चार के तहत वाहन जांच के नाम पर उनकी 35 बसों को जानबूझकर रोक लिया गया, जबकि सभी बसें बीएस-छह मानक की थीं।इससे नाराज कार्यकर्ता गाडिय़ों से उतरकर पैदल ही दिल्ली की ओर मार्च करने लगे और करीब आधे घंटे की झड़प के बाद बैरिकेड हटाकर सभी बसों को निकलवा ले गए। गुरुग्राम से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मुख्य काफिला सुबह 10 बजे सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली मैदान से रवाना हुआ था। रवानगी के दौरान पूर्व सांसद राज बब्बर और रैली के गुरुग्राम प्रभारी पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक, शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डावर और ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन यादव मौजूद रहे।साउथ सिटी से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ड मुकेश शर्मा के नेतृत्व में भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बसों और निजी वाहनों से रवाना हुए। फरुखनगर, पटौदी, सोहना, मानेसर से भी अलग-अलग हुजूम दिल्ली के लिए निकले।इसी दौरान दिल्ली जयपुर हाईवे पर सरहौल बार्डर पर ग्रेप के तहत बीएस-छह से नीचे वाले वाहनों की जांच के लिए पुलिस का सघन अभियान चल रहा था।

पुलिस ने कांग्रेसियों के काफिले की गाडिय़ों की भी जांच शुरू की। काफिले की कारें तो जांच के बाद निकल गईं, लेकिन 35 बसों को जांच के नाम पर रोक लिया गया।दोनों जिलाध्यक्षों पंकज डावर और वर्धन यादव ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को बताया कि उनकी बसों का परमिट लिया हुआ है और सभी बसें बीएस-6 हैं। इसके बावजूद पुलिसकर्मी बसों की जांच के नाम पर उन्हें रोके रहे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बार्डर पर उनके काफिले को रोकने का प्रयास किया। लेकिन, कार्यकर्ताओं के जोश के आगे पुलिस को हटना पड़ा। नेताओं ने कहा कि तानाशाही सरकार डर गई है। कार्यकर्ताओं को रैली में जाने से रोकना सरकार की बौखलाहट का सबसे बड़ा सबूत है। यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की नहीं, देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है।

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