ट्रंप की नीतियों से डेन्मार्क में असंतोष @ डॉ. सुधीर सक्सेना

ट्रंप की नीतियों से डेन्मार्क में असंतोष
- डॉ. सुधीर सक्सेना
आखिरकार सुन्दर, शांत और सुरम्य देश डेन्मार्क भी आंदोलन और प्रदर्शनों की चपेट में आ गया। कम आबादी के छोटे देश डेन्मार्क में बवाल की वजह बनी हैं कुछ घरेलू नीतियाँ और उससे बढ़कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दादागिरी। दरअसल, स्वेच्छाचारी ट्रंप विस्तारवाद में यकीन रखते हैं और वेनेजुएला पर निर्लज्ज कब्जे के बाद उनकी गिद्धदृष्टि ग्रीनलैंड पर पड़ गयी है। लंबी चर्चा के पश्चात डेन्मार्क, अमेरिका और ग्रीनलैंड में सुरक्षा समझौता तो हो गया है, अलबत्ता ग्रीनलैंड पर खतरे की तलवार अभी भी लटक रही है और वृहत्तर डैनिश समुदाय की आशंका है कि ट्रंप कभी भी अपने वायदे से मुकर सकते हैं। जहाँ तक त्रिपक्षीय संधि का प्रश्न है, संधि की शर्तों में अमेरिकी प्रभुत्व साफ दीखता है। अमेरिका ने ग्रीनलैंड की प्रभुसत्ता और आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान तो किया है, किंतु आगामी दो वर्षों के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा का नियंत्रण अमेरिकी हाथों में रहेगा। जाहिर है कि समझौते की तुला में अमेरिकी पलड़े में बाँट ज्यादा हैं।
डेन्मार्क उत्तरी योरोप का छोटा सा मुल्क है। मुल्क क्या, यह मुख्य भूखण्ड के अलावा चार सौ से अधिक द्वीपों का समूह है। जर्मनी से लगी सीमा को छोड़ दें तो यह सब ओर से समुद्र से घिरा है। इंग्लैंड की भांति डेन्मार्क में भी राजशाही है और सन 2024 से सम्राट फ्रेडरिक, दशम का शासन है। इसकी लम्बी समुद्री सीमा इसे विशिष्ट बनाती है। फरो और ग्रीनलैंड इसके अधीन स्वायत्तशासी राज्य है। यारोपीय इतिहास में अपनी भूमिका के लिये चर्चित डेन्मार्क फिलवक्त कई खूबियों के लिए जाना जाता है। यह आइसलैंड के बाद विश्व का सर्वाधिक शांत देश है और न्यूजीलैंड और स्वीडन के साथ विश्व में लघुत्तम भ्रष्ट देश की पायदान खड़ा है। यहां की कुल आबादी 60 लाख से भी कम है।
डेन्मार्क की राजधानी कोपेनहेगन और ग्रीनलैंड की पाटनगरी, नूक में प्रदर्शन दर्शाती है कि अमेरिका के साथ समझाते और ट्रंप की ‘हड़पो-नीति’ से डेन्मार्क और ग्रीनलैंड के नागरिक संतुष्ट नहीं हैं। उन्ह अमेरिका की नीयत पर शक है। यही वजह है कि कोपेनहेगन और नूक में प्रदर्शनकारियों ने ‘ग्रीनलैंड नाट फॉर सेल’ (ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है), यैंकी वापस जाओ और मेक अमेरिका गो अवे जैसे नारे लगाये। कोपनहेगेन में भूतपूर्व सैनिकों ने मार्च भी निकाला। ग्रीनलैंड और डेन्मार्क के नागरिक ट्रंप की बदनीयत से आशंकित हैं। वे ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत की नियुक्ति और ट्रंप की जब-तब टैरिफ की धमकियों को शक की नजर से देखते हैं।
डेन्मार्क की गिनती अमेरिका के हितैषी देशों में होती है। अपनी इसी नीति के फलस्वरूप प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने मध्य सितंबर में रूसी युद्धपोत के डैनिश हेलीकॉप्टर पर वार की कड़ी निंदा की। वैश्विक मामलों में विनम्रता बरतने के बावजूद मेटे की घरेलू नीतियों से असंतोष बढ़ रहा है और उसका लाभ धुर-दक्षिणपंथी पार्टी डांसफोक (डैनिश पीपुल्स पार्टी) को मिल रहा है, जो मेटे की उदार और मुक्त आव्रजन-नीतियों तथा कथित इस्लामीकरण का विरोध कर रही है। डांसफोक का यही मुद्दा ट्रंप का ट्रंपकार्ड है। जहां तक आव्रजन का प्रश्न है, डेन्मार्क में करीब 57000 उक्रेनी शरणार्थी हैं। बड़ी संख्या में पोलैंड और तुर्किये के शरणार्थी भी डेन्मार्क में आ बसे हैं। माना जाता है कि आव्रजन के अलावा मुद्रास्फीति, महंगाई और भारी कराधान से असंतोष में इजाफा हुआ है। इसके अलावा नागरिकों के राजनेताओं पर यकीन में भी कमी आई है। बहरहाल उनसे पनपे आंदोलन का दूसरा पहलू यह है कि वाम और नस्लभेद विरोधी समूहों ने प्रति-आंदोलन शुरू कर दिया है। फलत: सड़कों पर कभी न देखे गये दृश्य देखने को मिल रहे हैं।

