बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश को एकजुट रखने के लिए एक संविधान की पैरोकारी की थी: सी. जे. आई., बी.आर. गवई

नागपुर। सीजेआई बीआर गवई ने शनिवार को कहा, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश को एकजुट रखने के लिए एक संविधान की पैरोकारी की थी। उन्होंने कभी किसी राज्य के लिए अलग संविधान के विचार का समर्थन नहीं किया।

यहां संविधान प्रस्तावना पार्क के उद्घाटन के मौके पर सीजेआई ने कहा, जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ‘एक संविधान’ के तहत अखंड भारत के डॉ. आंबेडकर के दृष्टिकोण से प्रेरणा ली। सीजेआई गवई तत्कालीन सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की उस संविधान पीठ का हिस्सा थे, जिसने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा था।

उन्होंने कहा, ‘अनुच्छेद 370 का केस हमारे समक्ष आया। सुनवाई के दौरान मुझे डॉ. आंबेडकर के शब्द याद आए कि देश को एकजुट रखना चाहते हैं तो एक संविधान की आवश्यकता है।’ कार्यक्रम में, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सीएम देवेन्द्र फडणवीस भी थे।

भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने शनिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले को बरकरार रखा है, ताकि देश में केवल एक संविधान चले, जैसा कि डॉ बीआर अंबेडकर ने सोचा था।

मुख्य न्यायाधीश ‘संविधान प्रस्तावना पार्क’ के उद्घाटन और एक लॉ कॉलेज में अंबेडकर की प्रतिमा के अनावरण के लिए नागपुर में थे।

सीजेआई तत्कालीन सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का हिस्सा थे, जिसने दिसंबर 2023 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा था।

सीजेआई गवई ने कहा, “जब संसद ने अनुच्छेद 370 को निरस्त किया और इसके खिलाफ चुनौती हमारे सामने आई, तो सुनवाई के दौरान मैंने डॉ अंबेडकर के भाषण का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि संयुक्त राज्य अमेरिका में, संघीय सरकार का एक संविधान है जो बहुत सीमित विषयों पर शासन करता है और हर राज्य का अपना संविधान भी है जिसका दायरा अधिक है।”

उन्होंने कहा, “इसलिए डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि इस देश को एकजुट रखने के लिए एक ही संविधान की जरूरत है। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से पहले, सिर्फ एक राज्य के लिए अलग संविधान अंबेडकर की दृष्टि या सोच के अनुरूप नहीं था और इसलिए, हमने सर्वसम्मति से संसद के फैसले को बरकरार रखा ताकि देश केवल एक संविधान से संचालित हो।”

सीजेआई ने कहा, “भले ही हमारा संविधान संघीय है, लेकिन यह अमेरिका जैसा नहीं है। यह संघीय होने के साथ-साथ एकात्मक भी है। कई लोगों ने आरोप लगाया था कि संविधान अत्यधिक केंद्रीकरण प्रदान करता है और युद्ध के समय देश एकजुट नहीं रह सकता। उन्हें बाबासाहेब ने दृढ़ता से जवाब दिया था, उन्होंने कहा था कि संविधान न तो अत्यधिक केंद्रीकृत है और न ही अत्यधिक संघीय। यह सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए उपयुक्त है। और उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि संविधान युद्ध और शांति दोनों समय में देश को एकजुट रखेगा।”

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘और अपने संविधान की 75 साल की यात्रा को देखते हुए, हम पड़ोसी देशों की स्थिति देख रहे हैं, चाहे वह पाकिस्तान हो, बांग्लादेश हो, नेपाल हो या श्रीलंका हो… जब भी हमारा देश चुनौतियों या संकटों का सामना करता है, तो यह मजबूती से एक साथ खड़ा रहा है और एकजुट रहा है।’’

संविधान निर्माण में अंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार करते हुए, सीजेआई ने अनुच्छेद 32 को संविधान का हृदय और आत्मा बताते हुए, लागू करने योग्य अधिकारों पर उनके जोर को याद किया। उन्होंने कहा, “बाबासाहेब ने कहा था कि अगर उन्हें लागू करने के लिए कोई उपाय नहीं हैं तो अधिकारों का कोई मतलब नहीं है।” “इसलिए आज हम संविधान में अनुच्छेद 32 देखते हैं जिसे हम मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में उपाय का अधिकार कहते हैं, जिसे सीधे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया जा सकता है। इसकी जड़ 17 दिसंबर, 1946 को अंबेडकर के भाषण में निहित है,” उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

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