मन की पवित्रता उन्नति का सशक्त मार्गः प्रभु प्रिया

कोरबा 31 मार्च। बाल विदुषी प्रभु प्रिया ने कहा है कि मन अशुद्ध है तो नकारात्मक विचार उत्पन्न होने स्वाभाविक है इसलिए मन की पवित्रता आवश्यक है। मानस का यही तात्पर्य है। सफलता और उन्नति के लिए पवित्र भाव रखें। यह हर दौर में अनिवार्य तथ्य की भूमिका निभाएगा।
माता दीपेश्वरी मंदिर दीपका में श्रीराम कथा प्रवचन करते हुए उन्होंने यह बात कही। प्रभु प्रिया ने सत्संग और श्रीराम भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य जजमान लव कुमार राठौर एवं श्रीमती नीलू राठौर रहे। श्रीमद् भागवत एवं श्रीराम कथा का पूरे भारत वर्ष में प्रचार कर रहीं प्रभु प्रिया ने अपने 251वें प्रवचन में सत्संग के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि सत्संग से जीवन में आनंद प्राप्त किया जा सकता है। जीवन में सत्संग जरूरी है । यदि हमें भगवान राम की प्राप्ति करनी है, तो तीन सीढियां चढनी होंगीकृ मानस, चरित्र और राम।
उन्होंने कहा कि दूसरी सीढ़ी चरित्र की होती है। व्यक्ति का चरित्र उत्तम होगा, तभी वह जीवन में सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। श्रीराम का आशीर्वाद पाने के लिए आचरण की शुद्धता आवश्यक है। तीसरी सीढ़ी राम तक वही पहुंच सकता है, जिसका मन और चरित्र दोनों पवित्र हों। श्रीराम भक्ति के लिए यह तीनों आधारशिला मानी जाती हैं।
25वें प्राकट्य महोत्सव के अंतर्गत श्री रुद्र चंडी महायज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है। यह अनुष्ठान पंडित शिवपूजन पांडे महाराज, वाराणसी के सानिध्य में संपन्न हो रहा है। इस यज्ञ के मुख्य जजमान शंकर राठौर एवं श्रीमती मंजू देवी राठौर हैं।