नेपाल में राजशाही की वापसी को लेकर प्रदर्शन, पूर्व नरेश पर हिंसा भड़काने का आरोप

काठमांडू, राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच शुक्रवार को हुई हिंसा के लिए पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए नेपाल सरकार ने उनकी सरकारी सुविधाएं और सुरक्षा हटा ली है और पासपोर्ट रद्द करने का निर्णय लिया है। उन्हें नजरबंद करने की अटकलें हैं और माना जा रहा है कि किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है। पुलिस ने 105 राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के महासचिव धवल शमशेर राणा और केंद्रीय सदस्य रवींद्र मिश्र समेत 50 से अधिक नेता व कार्यकर्ता शामिल हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दुर्गा प्रसाई फरार बताए जा रहे हैं। राजधानी में लगाया गया कर्पयू शनिवार की सुबह स्थिति कुछ हद तक सामान्य होने के बाद हटा लिया गया।

तिनकुने इलाके में शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने एक राजनीतिक दल के कार्यालय पर हमला किया, गाड़‌यिों में आग लगाई और दुकानों को लूटा। इस हिंसा में एक टीवी कैमरामैन समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 110 लोग घायल हुए। हालात बेकाबू होने पर सेना को तैनात किया गया। नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने भी शनिवार सुबह हिंसा प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सरकार की आगे की कार्रवाई के बारे में मीडिया को कोई बयान देने से इनकार कर दिया। सरकार हिंसा भड़काने में शामिल होने के लिए शाह पर अभियोग चला सकती है।

पूर्व नरेश पर हिंसा भड़काने के आरोप

नेपाल नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी सीपीएन-माओवादी सेंटर के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ने पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया और सरकार से पूर्व राजशाही के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की।

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