छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू, किसानों को बड़ी राहत; एग्रीस्टेक ID वालों को दोबारा पंजीयन की जरूरत नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने इस बार किसानों को पंजीयन और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं में बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। अब एग्रीस्टेक (AgriStack) आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को धान बेचने के लिए दोबारा पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इतना ही नहीं, ऐसे किसानों को धान विक्रय के दौरान समिति में अलग से ऋण पुस्तिका भी लेकर नहीं जाना पड़ेगा।

राज्य में 15 नवंबर 2026 से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होगी। इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा। इसके अलावा डिजिटल क्रॉप सर्वे, बायोमेट्रिक सत्यापन और 360 नए उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था भी की गई है।

एग्रीस्टेक आईडी वाले किसानों को दोबारा पंजीयन से राहत

धान खरीदी 2026-27 में किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पंजीयन प्रक्रिया में किया गया है। सरकार के निर्णय के अनुसार, पिछले खरीफ वर्ष में पंजीकृत ऐसे किसान जिनकी एग्रीस्टेक आईडी उपलब्ध है, उन्हें इस बार दोबारा पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी।

इसके साथ ही धान बेचने के लिए समिति में अलग से ऋण पुस्तिका प्रस्तुत करने की अनिवार्यता भी नहीं रहेगी। इससे किसानों को दस्तावेजों के लिए बार-बार समितियों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। हालांकि, जिन किसानों की एग्रीस्टेक आईडी नहीं बनी है या जिनके रिकॉर्ड में त्रुटियां हैं, उन्हें संबंधित पंजीयन एवं सुधार प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

डिजिटल क्रॉप सर्वे से तय होगा धान का रकबा

इस बार धान खरीदी में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। इसके माध्यम से किसानों के खेतों में धान की खेती वाले वास्तविक रकबे का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।

डिजिटल सर्वे के आधार पर पात्र किसानों और धान खरीदी की निर्धारित सीमा का सत्यापन करने में मदद मिलेगी। इससे गलत रकबे के आधार पर धान बेचने जैसी संभावित अनियमितताओं पर भी नियंत्रण किया जा सकेगा।

बायोमेट्रिक सत्यापन से होगी किसानों की पहचान

धान खरीदी केंद्रों में इस बार बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की जाएगी। इसके तहत धान बेचने के लिए पहुंचने वाले किसानों की पहचान का सत्यापन किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य वास्तविक किसानों से ही धान खरीदी सुनिश्चित करना और बिचौलियों की अनधिकृत भूमिका पर अंकुश लगाना है। इससे खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

360 नए उपार्जन केंद्र खुलेंगे, कुल संख्या 3100

किसानों को धान बेचने में होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। इनके शुरू होने के बाद खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में प्रदेशभर में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी।

नए केंद्र खुलने से किसानों को दूर-दराज के खरीदी केंद्रों तक जाने की जरूरत कम होगी। साथ ही पुराने केंद्रों पर भीड़ और दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।

3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी धान खरीदी

राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार, इस वर्ष किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा। धान की घोषित खरीदी दर 3100 रुपये प्रति क्विंटल रखी गई है।

इस हिसाब से एक एकड़ में निर्धारित अधिकतम सीमा के अनुसार धान बेचने पर किसान को 65,100 रुपये तक मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक भुगतान किसान के सत्यापित रकबे, बेची गई धान की मात्रा और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करेगा।

15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, किसानों को क्या करना होगा?

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी शुरू होने जा रही है। ऐसे में किसानों को अभी से अपनी जरूरी जानकारी और दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए।

  • एग्रीस्टेक आईडी की उपलब्धता और जानकारी जांच लें।
  • पिछले वर्ष का पंजीयन रिकॉर्ड सत्यापित कर लें।
  • डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज धान के रकबे की जानकारी देखें।
  • रिकॉर्ड में किसी तरह की त्रुटि होने पर संबंधित समिति या अधिकारियों से संपर्क करें।
  • धान खरीदी केंद्र में बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए आवश्यक तैयारी रखें।

कुल मिलाकर, एग्रीस्टेक आईडी, डिजिटल क्रॉप सर्वे, बायोमेट्रिक सत्यापन और नए उपार्जन केंद्रों के जरिए राज्य सरकार इस वर्ष धान खरीदी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की तैयारी में है। अब किसानों को 15 नवंबर से शुरू होने वाली खरीदी का इंतजार है।

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