CGPSC Scam: चेतन बोरघरिया के खाते में 170 ट्रांजेक्शन से 66.64 लाख जमा, ED का बड़ा खुलासा

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा 2020-21 में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया को ED ने 11 सितंबर 2026 को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं।

ED के मुताबिक, जांच के दौरान चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में संबंधित अवधि में 170 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 66.64 लाख रुपये नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी ने चेतन बोरघरिया और मामले के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई वित्तीय लेन-देन मिलने का भी दावा किया है।

170 ट्रांजेक्शन में जमा हुए 66.64 लाख रुपये

ED की वित्तीय जांच में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 लेन-देन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपये जमा होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी ने उनके और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुए कई वित्तीय लेन-देन को भी जांच के दायरे में लिया है।

ED ने 1 सितंबर को बोरघरिया से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली थी। इस दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। एजेंसी के मुताबिक, इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में दोनों के बीच वित्तीय लेन-देन, रकम की वापसी और भुगतान की मांग से संबंधित बातचीत सामने आई।

अभ्यर्थियों से 3 करोड़ से ज्यादा की रकम लेने का आरोप

ED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित अवैध रकम जुटाई।

जांच एजेंसी का आरोप है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में संपर्क और प्रभाव होने का दावा किया गया था।

ED का कहना है कि इन कथित आश्वासनों के लिए उस समय मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और आधिकारिक पद का इस्तेमाल किया गया।

मैरिज पैलेस में कथित तौर पर बांटा गया प्रश्नपत्र

ED के मुताबिक, CGPSC परीक्षा में कथित पेपर लीक की प्रक्रिया परीक्षा से पहले ही शुरू हो गई थी। एजेंसी का दावा है कि प्रारंभिक परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में बुलाया गया, जहां उन्हें कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया।

इसके बाद मुख्य परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को बरनवापारा अभयारण्य स्थित एक रिसॉर्ट में ठहराया गया। ED के अनुसार, वहां कथित तौर पर मुख्य परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र के आधार पर कोचिंग कराई गई।

Figurecave E-Com के लेन-देन भी जांच के घेरे में

ED की जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी सामने आने की बात कही गई है। एजेंसी को संदेह है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित अपराध से अर्जित रकम को अलग-अलग स्तर पर घुमाने और फंड की लेयरिंग के लिए किया गया।

जांच एजेंसी ने बैंकिंग लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और PMLA के तहत दर्ज बयानों के आधार पर चेतन बोरघरिया की कथित भूमिका की जांच की है।

11 सितंबर को ED ने किया गिरफ्तार

ED ने चेतन बोरघरिया को 11 सितंबर 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने पूछताछ के लिए ED को छह दिन की हिरासत दी।

ED के मुताबिक, बोरघरिया वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। वह वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD के रूप में पदस्थ रहे थे।

क्या है CGPSC घोटाला?

यह मामला CGPSC की राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों से जुड़ा है। मामले की जांच पहले राज्य की आर्थिक अपराध शाखा से जुड़ी थी, जिसके बाद CBI ने जांच अपने हाथ में ली। CBI ने इस मामले में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

ED फिलहाल इस मामले में कथित अपराध से अर्जित रकम के लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।

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