पर्वतारोहण से कमाई के फेर में नेपाल

  • डॉ. सुधीर सक्सेना

पर्वतारोहण से कमाई के फेर में नेपाल
• डॉ. सुधीर सक्सेना
पर्वतारोहण रोमांचक शौक है, जो जोखिम और खतरों के बीच परवान चढ़‌ता है। पर्वतारोहण संकल्प से सिद्धि की जीवटभरी गाथा है। तेनजिंग नोर्के और एडमंड हिलेरी को अमरत्व इसी पर्वतारोहण की देन है। पर्वतारोहण मनुष्य के साहस के लिये चुनौती है और जान जाने के डर के बावजूद मनुष्य है कि पहाड़ों पर चढ़‌ने से बाज नहीं आता। विश्व में दस में से आठ सर्वोच्च शिखर भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हैं। इनमें सर्वोच्चतम है कि एवरेस्ट यानि सागरमाथा। पर्वतारोहण में शेरपाओं की कुशलता की दुनिया कायल है। पर्वतारोहण का ताजा और रोचक प्रसंग यह है कि पर्वतीय राष्ट्र नेपाल पर्वतारोहण से कमाई के फेर में पड़ गया है।
यह खबर ज्यादा पुरानी नहीं, बल्कि पिछले साल की है। गत वर्ष 12 अगस्त को खबर आई थी कि नेपाल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये पर्वतारोहण का सहारा लगा। अपनी इस नयी नीति के तहत उसने आगामी दो वर्षों के लिये दूरदराज के इलाकों में हिमालय की 97 चोटियों पर चढ़ाई को मुफ्त करने की बात कही थी, लेकिन तुर्रा यह कि उसी साल सितंबर से नगाधिराज हिमालय की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर पीक सीजन में चढ़ाई के लिये परमिट फीस बढ़ाकर 15000 डालर कर दी गयी थी। गौरतलब है कि पर्वतारोहण नेपाल के लिये विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा जरिया है। पिछले साल पर्वतारोहण से उसे 5.9 मिलियन डालर की कमाई हुई थी। इसमें तीन-चौथाई से अधिक योगदान माउंट एवरेस्ट का था। सन 2024 में एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिये चार सौ से भी अधिक परमिट जारी किये गये थे। कह सकते हैं कि हिमाच्छादित एवरेस्ट को पर्वतारोहियों की भीड़ का सामना करना पड़ रहा है, जिसका उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 8849 मीटर से अधिक ऊंची चोटी एवरेस्ट हाल के सालों में भीड़‌भाड़, पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं और चढ़ाई के दम्यान कई जानलेवा हादसों से जूझ रही है। अप्रैल, सन 2024 में नेपाल की सर्वोच्च न्यायालय ने नेपाल सरकार को एवरेस्ट और अन्य अनेक चोटियों के लिये जारी किये जाने वाले परमिटों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि पहाड़ों की क्षमता का सम्मान किया जाना चाहिये, लेकिन पहाड़ों से कमाई के चस्के के फेर में सरकार के कानों पर जूँ नहीं रेंगी। फलतः उसने सुप्रीम कोर्ट के परवाने को बलाये ताक रखकर परमिट काटना बदस्तूर जारी रखा। उसने इनकम जेनरेट करने की तालिका बनाई। तदनुसार अप्रैल-मई के मुख्य सीजन के अलावा शेष अवधि में जो आरोहण के इच्छुक हैं, उनके लिये सितंबर से नवंबर के बीच एवरेस्ट चढ़ाई की फीस 7500 डालर और और दिसंबर से फरवरी के मध्य 3750 डालर तय कर दी। दिसंबर, 25 तक सभी रास्तों से एवरेस्ट पर 13737 बार चढ़ाई हुई इसमें 6656 क्लायंट और 7081 क्लाइंबर शामिल थे। सफलता की दर 50 प्रतिशत से भी कम रही। लोकप्रिय दक्खिनी रास्ते पर सबसे ज्यादा मौतें हुई। नेपाल की तरफ जिन 116 पर्वतारोहियों की मृत्यु हुई, उनमें 51 फीसद वे लोग थे, जो एक्स्ट्रा आक्सीजन का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। तिब्बत की तरफ ऐसी 41 मौतें हुई।
सन 2000 के बाद से एवरेस्ट पर ‌चढ़‌ने वालो की संख्या में जबदस्त उछाल आया है। इससे एवरेस्ट प्रदूषण की गिरफ्त में है। सैलानियों और पर्वतारोहियों द्वारा छोड़े गये हजारों किलो कचरे, प्लास्टिक, आक्सीजन सिलेंडरों और मानव अपशिष्ट के कारण इसे दुनिया का सबसे ऊंचा कचरा घर कहा जाने लगा है। दिक्कत यह है कि कमाई के फेर में कचरा हटे तो हटे कैसे?
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