अटल जी की ब्रांज मेटल से बनी प्रतिमा का अधिकारियों ने किया निरीक्षण

मामले के तूल पकडने पर प्रशासन ने लिया संज्ञान
कोरबा 29 जुलाई। जिले के कटघोरा नगर पालिका क्षेत्र में 30 लाख से विकसित अटल परिसर में लगाई गई पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा की क्वालिटी को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। धातु से बनी प्रतिमा का रंग कैसे निकल रहा है और भीतर की आवाज में खनक क्यों नहीं है, इस पर सवाल खड़े हो गए। मामले के तूल पकडने पर प्रशासन ने संज्ञान लिया। बिलासपुर से पहुंचे तकनीकी विभाग के कार्यपालन अभियंता सहित टीम ने क्षेत्र का मुआयना किया। तकनीकी दृष्टिकोण से ब्रांज मेटल से बनी प्रतिमा का परीक्षण किया गया। संपूर्ण जांच रिपोर्ट के साथ इस मामले में अगल एक्शन होगा।
सरकार ने प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यादों को स्थाई बनाने के लिए अटल परिसर का निर्माण कराया और वहां प्रतिमाएं लगवाई। इसके लिए तीनों निकायों के मामले में अलग-अलग बजट तय किया गया। इसमें लाखों की लागत से अटल जी की कांस्य प्रतिमा लगाई जानी सुनिश्चित की। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया निकायों ने की। उन्हें पैरामीटर्स के तहत सुनिश्चित किए गए सप्लाइयर/निर्माता से ब्रांज मेटल से तैयार प्रतिमा ली जानी थी। खबर के अनुसार कटघोरा में परिसर के विकास पर कुल 30 लाख रुपए खर्च किए गए। मापदंडों के अंतर्गत संबंधित प्रतिमा की लागत 13 लाख थी। तब दावा किया गया कि नियमों के तहत प्रतिमा की खरीदी की गई और स्थापित किया गया। हालिया बारिश में प्रतिमा के कुछ हिस्से का रंग उखड़ गया। ऐसे में कई लोगों को मेटल से बनी प्रतिमा की धात्विक गुण धर्मिता के साथ-साथ गुणवत्ता पर संदेह हुआ। सामान्य सिद्धांत के तहत जब प्रतिमा पर उंगली लगाई गई तो उसमें से निकलने वाली ध्वनि ने ऐसा संकेत दिया कि धातु के बजाय कुछ और चीज का उपयोग निर्माण में किया गया। धीरे-धीरे बात आगे बढ़ी और फिर फैल गई। यहां से यह एक मुद्दा बन गया।
नगर पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल के साथ भाजपा के पार्षद पवन अग्रवाल ने फौरी तौर पर दी गई प्रतिक्रिया में कहा कि इस तरहका कृत्य गलत है और अगर प्रतिमा धातु के नहीं है तो फिर जांच के साथ जवाबदेही तय होना चाहिए। खबर के अनुसार इस मामले को सरकार के साथ प्रशासन के अधिकारियों ने काफी गंभीरत से लिया। इस कड़ी में बिलासपुर से तकनीकी विभाग के एक कार्यपालन अभियंता और उनकी टीम ने आज कटघोरा पहुंचकर अटल परिसर का मुआयना किया। यहां पर लगी प्रतिमा का अपने स्तर पर परीक्षण किया। उन लोगों से भी जानकारी प्राप्त की गई जो इस काम में शामिल थे। संपूर्ण पड़ताल के बाद अधिकारी आगे रिपोर्ट करेंगे।
सूत्रों के अनुसार कई मानकों के आधार पर इस पूरे काम के मामले में एजेंसी को भुगतान करना था। परीक्षण से लेकर मूल्यांकन की औपचारिकता के बाद ही अधिकारियों ने उन फाइलों पर हस्ताक्षर किए जो अटल परिसर के विकास के लिए तैयार की गई। इसी के जरिए भुगतान का काम पूरा हो सका। अब जबकि अटल बिहारी वाजपेयी की ब्रांज मेटल वाली प्रतिमा रंग छोड़ रही है, तब यह भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि प्रतिमा की आपूर्ति से लेकर उसे इंस्टाल करने के दौर में स्थानीय अधिकारियों ने कुछ देखा ही नहीं, या फिर औपचारिकता के तौर पर मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर दी, ताकि भुगतान में देर न हो। माना जा रहा है कि अगर जांच-पड़ताल और रिपोर्ट में कुछ भी गलत पाया गया तो मूल्यांकनकर्ता इंजीनियर चंद्रप्रकाश जायसवाल के साथ-साथ सप्लायर और ठेकेदार नप सकते हैं।
