रतनजोत के पौधों को काटकर नये वृक्षारोपण किये जाने का ग्रामीणों ने किया विरोध

कोरबा 19 जुलाई। कटघोरा वनमंडल के पसान वनपरिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा कराये जा रहे कार्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा क्षेत्र में सालों पुराने, पर्यावरण के लिए अनुकूल और औषधीय गुणों से भरपूर रतनजोत के पौधों को बड़े पैमाने पर काटा और उखाड़ा जा रहा है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर सर्किल को एक पत्र सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, कटघोरा वनमंडलाधिकारी ने बड़े पैमाने पर कटाई की बात से साफ इनकार करते हुए लिखित शिकायत मिलने पर नियमानुसार जांच की बात कही है। ग्रामीणों द्वारा वन विभाग के आला अधिकारियों को सौंपे गए शिकायत पत्र के अनुसार यह मामला करीब 16-17 वर्ष पुराना है। उस समय पसान परिक्षेत्र के सेमरा बीट में वन भूमि पर अतिक्रमण (नवतोड़) को रोकने के उद्देश्य से तुलसीडांड और ग्राम सैला के कटेलामुड़ा में 100-100 हेक्टेयर के विशाल रकबे पर रतनजोत के पौधों का वृहद रोपण किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि ये पौधे अब पूरी तरह स्थापित होकर पर्यावरण संरक्षण में मदद कर रहे थे, लेकिन पसान रेंज के अधिकारियों द्वारा इन उपयोगी पौधों को उखाडकर उनकी जगह दूसरा नया पौधा लगाया जा रहा है। जड़ें उखडने के कारण क्षेत्र में भूमि का क्षरण और मिट्टी का बहना भी शुरू हो गया है, जिससे पर्यावरण को दोहरा नुकसान पहुंच रहा है।
शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर वित्तीय सवाल भी खड़े किए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक साल 2022-23 में तुलसीडांड रोपण क्षेत्र में मिश्रित प्रजाति के नए पौधों का रोपण किया गया था, लेकिन उचित देखरेख के अभाव में उस समय लगाए गए पौधों का कोई विकास नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे शासकीय राशि का सीधे तौर पर दुरुपयोग हुआ है। उनका सवाल है कि जब पिछला रोपण पूरी तरह असफल रहा, तो फिर से पुराने हरे-भरे पौधों को नष्ट कर नया रोपण करने का क्या औचित्य है।
