बेसहारा लोगों का बड़ा सहारा बना अपना घर सेवा आश्रम

अपमान नहीं प्रभुजन नाम देकर देते हैं सम्मान

कोरबा 03 मई। शहर की सड़कों और यातायात सिग्नल के आसपास अक्सर ऐसे लोग दिख जाते हैं, जिनके वेशभूषा अस्त व्यस्त और कपड़े मैले होते हैं। इनके पास कोई नहीं जाना चाहता है। ना ही इन्हें कोई अपने पास आने देता है। ऐसे ही बेसहारा लोगों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरा है, कोरबा जिले का अपना घर सेवा आश्रम।

’ बेसहारा लोगों की मददगार बनी संस्था
यह संस्था समाज के ऐसे लोगों का रेस्क्यू करती है, जिन्हें कोई भी अपने पास रखना नहीं चाहता। संस्था ऐसे जरुरतमंद लोगों की देखभाल कर उन्हें समाज में रहने लायक जीवन बिताने का अवसर प्रदान करती है। अपना घर सेवा आश्रम में ऐसे ही लगभग 90 महिला और पुरुषों को रखा गया है। जो सड़क पर यहां वहां घूमते हुए बेहद दयनीय जीवन व्यतीत कर रहे थे।

अपना घर सेवा आश्रम के संस्था ने इन जैसे लोगों को ष्प्रभुजनष् का नाम दिया है। संस्था का मानना है कि जिसका कोई नहीं, उसके प्रभु श्री राम तो होते हैं। इसलिए इन्हें प्रभुजन कहकर पुकारा जाता है।प्रभुजनों के लिए जो रसोई है, उसे भी राम जी की रसोई कहा जाता है। कोई दानदाता यदि दान देना चाहे तो उनके लिए राम जी की रसोई में आवश्यकता वाली वस्तुओं की एक लिस्ट भी आश्रम में लगाई गई है। इनमें से ज्यादातर लोग मानसिक तौर पर स्वस्थ नहीं होते। अपना घर में उनकी सेवा की जाती है, चिकित्सकों के परामर्श पर यथा संभव इलाज भी दिया जाता है. कई बार तो सकारात्मक परिणाम मिले हैं और याद आ जाने पर उन्हें सकुशल उनके घर भी पहुंचाया गया है।

तीन टाइम का खाना और इलाज की व्यवस्था
अपना घर सेवा आश्रम एक ऐसी संस्था है, जिनकी मदद की जरूरत कभी-कभी पुलिस को भी पड़ जाती है। अक्सर सड़क पर घूमने वाले मानसिक तौर पर कमजोर लोग पुलिस के लिए भी चुनौती बन जाते हैं। सड़क दुर्घटना के शिकार होने का खतरा रहता है और कई तरह की अन्य परेशानी भी रहती हैं। कई अवसर ऐसे आए हैं, जब पुलिस वालों ने ही ऐसे लोगों को अपना घर सेवा आश्रम के सुपुर्द किया है। कई बार सामान्य लोग भी घुमंतू लोगों को अपना घर सेवा आश्रम में छोड़ जाते हैं। तो कई अवसर ऐसे भी आए जब अपना घर सेवा आश्रम के वॉलिंटियर्स और कर्मचारियों ने सड़क पर घूम रहे घुमंतू लोगों का रेस्क्यू कर उन्हें अपना घर में लाया और फिर उनकी देखभाल शुरू की।

अपना घर में महिला और पुरुषों के अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं। जिनकी मानसिक स्थिति थोड़ी ठीक है, उनके लिए भी एक पृथक वार्ड है। कई अवसर ऐसे भी आएं जब यहां रहने आए लोगों की ठीक-ठाक देखभाल हुई। दवा मिली तब उनकी याददाश्त तेज हुई। लोगों को उनका घर याद आया और फिर परिजनों से संपर्क कर यहां रहने वाले प्रभुजनों को उनके घर भेज दिया गया। ऐसे गुमशुदा लोग जब अपने परिवार के पास वापस लौटते हैं, तो परिजन भी काफी खुश होते हैं। फिलहाल अपना घर सेवा आश्रम में 90 प्रभुजन निवास करते हैं।

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