आंगनबाड़ी में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों का पूरा डाटा विद्यालय जाने के पहले होगा तैयार

आंगनबाड़ी में अपार आईडी बनाने कार्य हुआ शुरू
कोरबा 03 मई। 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों की अपार आईडी अब आंगनबाड़ी केंद्रों में बनेगी। इस व्यवस्था से कक्षा 1 में प्रवेश के दौरान दस्तावेजों की परेशानी कम होगी। अब तक अपार आईडी बच्चों के पहली कक्षा में पहुंचने के बाद विद्यालयो में बनाई जाती थी। लेकिन अब प्रक्रिया में बदलाव करते हुए आंगनबाड़ी में ही अपार आईडी की व्यवस्था कर दी गई है। जिससे खासतौर पर निचले और गरीब तबके से आने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों को काफी राहत मिलेगी।
बताया जा रहा हैं कि अपार आईडी बच्चों का एक स्थायी शैक्षणिक रिकॉर्ड होता है। जिसमें नाम, जन्मतिथि, निवास और जाति प्रमाणपत्र जैसी मूलभूत जानकारियां दर्ज रहती हैं। आंगनबाड़ी स्तर पर यह रिकॉर्ड बन जाने के बाद स्कूल में एडमिशन के वक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस आईडी से देश के किसी भी हिस्से में आसानी से प्रवेश मिल सकेगा। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए कॉलेज में दाखिले के वक्त भी अपार आईडी की आवश्यकता पड़ती है।
’ कैसी होती है अपार यूनिक आइडी ?
अपार यूनिक आइडी 12 अंकों की एक यूनिक आईडी होती है। इसमें बच्चों का संपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेज कक्षावार अंकसूची, प्रशस्तिपत्र सहित अन्य प्रमाण पत्र शामिल किए गए है। शिक्षण संचालनालय ने इसकी शुरूआत की है। दस्तावेज गुमने पर यह आनलाइन रिकार्ड के रूप में उपलब्ध रहता है। इसके आधार पर दूसरी प्रति प्राप्त की जा सकती है। स्कूल में पढ़ाई पूरा करने के बाद कभी भी 12 अंकों के आधार दस्तावेज प्राप्त किया जा सकता है। स्कूल की पढ़ाई के बाद विश्वविद्यालय में पंजीयन करवाते वक्त भी अपार आईडी की आवश्यकता होती है। इसके बिना पंजीयन की प्रक्रिया को पूर्ण नहीं किया जा सकता।
’ महिला बाल विकास ने शुरू की है तैयारी
आपार आईडी के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का नाम पहले से दर्ज रहता है, इसलिए सही जानकारी के आधार पर आईडी बनाना आसान प्रक्रिया है। अक्सर देखा जाता है कि आधार कार्ड में नाम या अन्य विवरण गलत होने से स्कूल में दाखिले के समय परेशानी होती है। नई व्यवस्था से इस तरह की दिक्कतें कम होंगी और प्रवेश प्रक्रिया सरल बनेगी। बच्चों के एडमिशन के वक्त आधार कार्ड में गलत नाम अंकित होने पर अभिभावकों को दाखिल रजिस्टर वास्तविक नाम, जाति लिखवाने से परेशानी होती है। बच्चों के जन्म लेने के साथ आंगनबाड़ी में नाम जुड़ जाता है।
’ वन नेशन वन स्टूडेंट की परिकल्पना
अपार आईडी बनाने की प्रक्रिया आंगनबाड़ी केंद्र से शुरू होने से वन नेशन वन स्टूटडेंड की अवधारणा मजबूत होगी। इसके तहत न केवल स्कूल बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों में अध्ययन करने वालों विद्यार्थियों की भी आनलाइन रिकार्ड उपलब्ध होगा। बच्चों के लिए संचालित होनी वाली कई योजनाओं का भी सही आकलन अपार आईडी से हो सकेगा। महिला एवं बाल विकास विभाग से अपार आइडी बनाने के विभागीय स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने मोबाइल के जरिए अपार आईडी बनाने की शुरुआत भी कर दी है।
’ जिले में 2604 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित
जानकारी के अनुसार कोरबा जिले में 2604 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है। जहां कुल मिलाकर 3 से 6 वर्ष तक के डेढ़ लाख से भी अधिक बच्चे मौजूद हैं। आपार आईडी बनने से बच्चों के न केवल अंतर जिला बल्कि देश के किसी भी राज्य में दाखिले में असुविधा नहीं होगी। स्कूल के बाद कॉलेज की पढ़ाई तक अपार आईडी बच्चों के काम आती है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी बसंत मिंज ने बताया कि 3 से 6 साल के बच्चों का रिकॉर्ड तैयार होगा। विभागीय स्तर पर परियोजनावार इसकी तैयारी की जा रही है। बच्चों और उनके अभिभावकों को दस्तावेजों के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। अपार आईडी बच्चों के आगे की पढ़ाई के लिए काफी उपयोगी है। यह उनके काम आएगी।
अपार के काम में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीमंती शास्त्री ने कहा कि आईडी का काम हमें सौंपा गया है। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे स्कूल से पहले की शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। उन्हें भोजन भी कराया जाता है। विभाग से हमें इसके लिए जानकारी प्रदान की गई है। हम अपने मोबाइल और एप्प के जरिए अपार आईडी बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि मेरे आंगनबाड़ी केंद्र में 40 बच्चे मौजूद हैं। सभी की अपार आईडी बनाने का काम किया जा रहा है। ज्यादातर बच्चों के अपार आईडी मैंने बना दिए हैं। यह अपार आईडी बच्चों के काफी काम आती है। आगे की पढ़ाई के लिए यह काफी उपयोगी है। स्कूल में एडमिशन के समय, उन्हें अपार आईडी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। आंगनबाड़ी केंद्र में ही उनकी आईडी बन जाएगी।
