पश्चिम बंगाल को 25 स्पेशल ट्रेन, कोरबा का हिस्सा फिर खाली, लोगों में आक्रोश

कोरबा 23 अपै्रल। क्या रेलवे के लिए कोरबा वाकई महत्वपूर्ण जगह है या केवल दोहन का एक साधन। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों के साथ करार कर रेलवे प्रतिदिन यहां से लाखों टन कोयला का डिस्पैच मालगाडियों से कर भारी भरकम राजस्व कमा रहा है। इसके ठीक उल्टे जिले के लोगों को यात्री सुविधाओं के मामले में उसके द्वारा ठेंगा दिखाना जारी है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नेताओं की घोषणा पर 25 स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। दूसरी ओर कोरबा का हिस्सा एक बार फिर खाली है। इससे लोग चिढ़े हुए हैं।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के लिए सर्वाधिक राजस्व देने वाले प्रमुख स्टेशनों में शामिल कोरबा में रेल यात्री सुविधाओं को लेकर लंबे समय से उपेक्षा का भाव देखा जा रहा है। यहां के यात्रियों को न तो पर्याप्त नई ट्रेनें मिल पा रही हैं और न ही पहले से संचालित लोकल एवं अन्य ट्रेनों का नियमित संचालन सुनिश्चित हो पा रहा है। आए दिन ट्रेनों के अचानक बंद कर दिए जाने या उनके समय में बदलाव से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोरबा जैसे औद्योगिक और ऊर्जा नगरी में, जहां हजारों की संख्या में लोग रोजाना आवागमन करते हैं, वहां रेल सुविधाओं का यह हाल चिंता का विषय बन गया है। यात्रियों का कहना है कि एक ओर कोरबा से देशभर में कोयले का बड़े पैमाने पर परिवहन होता है, जिससे रेलवे को भारी आय प्राप्त होती है, वहीं दूसरी ओर यात्री सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। स्थिति को और गंभीर तब बना दिया जब संभागीय रेल प्रबंधक रंजन ने यह बयान दिया कि कोरबा से नई ट्रेन चलाने के पक्ष में फिलहाल रेलवे नहीं है। इस बयान से स्थानीय लोगों में निराशा और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि जब क्षेत्र रेलवे को इतनी बड़ी आमदनी दे रहा है, तो बदले में न्यूनतम यात्री सुविधाएं भी सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही हैं। इधर, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वहां 25 स्पेशल ट्रेनों के संचालन की घोषणा किए जाने से भी कोरबा के लोगों में असंतोष बढ़ा है। उनका सवाल है कि क्या रेलवे की प्राथमिकताएं केवल राजनीतिक और चुनावी जरूरतों तक सीमित हैं? यदि अन्य राज्यों में विशेष परिस्थितियों में ट्रेनों का संचालन बढ़ाया जा सकता है, तो कोरबा जैसे महत्वपूर्ण शहर को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है? स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि कोरबा से नई ट्रेनों के संचालन पर गंभीरता से विचार किया जाए, बंद की गई ट्रेनों को पुनः शुरू किया जाए और यात्री सुविधाओं में सुधार लाया जाए। उनका कहना है कि कोरबा का महत्व केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के लाखों लोगों की यात्रा आवश्यकताओं को भी समान रूप से महत्व दिया जाना चाहिए।
