….. लौट के वांस अमेरिका आये
- डॉ. सुधीर सक्सेना

अमेरिका-ईरान संधि वार्ता
….. लौट के वांस अमेरिका आये
• डॉ. सुधीर सक्सेना
महाबली अमेरिका और जुझारू ईरान के दरम्यां अम्न-ओ-अमान की वार्ता फैसलाकुन साबित नहीं हुई और 21 घंटों में ही उसने दमतोड़ दिया, फलत: उपराष्ट्रपति जेडी वांस अपने सहयोगियों-कुश्नर और विटकोफ के साथ अमेरिका लौट आये। उन्होंने बेनतीजा वार्ता को अमेरिका के लिये बुरा और ईरान के लिये बहुत बुरा करार दिया, तो यह साफ हो गया कि अमेरिका को शांति की ज्यादा फिक्र नहीं है और उसके मन में ईरान को तबाह करने का मंसूबा सिर उठाये हुये है।
इस्लामाबाद में हुयी शांति वार्ता में वांस की शिरकत से तेहरान को बड़ी उम्मीदें थीं। एक तो वह उदार माने जाते हैं, दूसरे अन्होंने 28 फरवरी से पेश्तर हंगरी में अपने बयान में ईरान पर धावे की मुखालफत की थी, लेकिन इस्लामाबाद में उनका रवैया अड़ियल रहा और वह ट्रंप के सुर में बोलते दिखे। यूं भी आंतंकवादी राष्ट्र के फौजी शासक की पहल पर हुई यह वार्ता शुरू से ही आशंका के आवर्त में रही। वार्ता के दरम्यान इस्रायल ने दक्षिण लेबनान पर बमबारी जारी रखी और हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम को मार गिराने का दावा किया। उसकी बमबारी से शवयात्रा में शरीक लेागों समेत करीब डेढ़ हजार लोग हताहत हुये। इस पर तेहरान की आपत्ति पर तेल अवीव ने ढिठाई से उत्तर दिया कि उसका शांति वार्ता से कोई वास्ता नहीं है। इस बीच अमेरिका ने अपना विमानवाहक युद्धपोत भी होरमुज की ओर रवाना किया, जिसे ईरान के ऐतराज के बाद डाइवर्ट किया गया। इससे जाहिर है कि इस्रायल अपना ग्रेटर इस्रायल, जिसमें गाजा, सिनाई, गोलन हाइट्स समेत सीरिया, लेबनान, जॉर्डन, मिस्र आदि के हिस्से शामिल हैं, के मिशन को पूरा करना चाहता है और ट्रंप ईरान को निर्णायक शिकस्त देना चाहते हैं।
तेहरान और वाशिंगटन के बीच झगड़े की जड़ यूरेनियम-संवर्द्धन और होर्मुज जलडमरूमध्य हैं। तेहरान परमाणु बम बनाने का इरादा तो छोड़ सकता है, किंतु परमाणु-संवर्द्धन का मिशन नहीं। ऐसे ही वह होर्मुज स्ट्रेट के हाथ लगे ब्लैंक-चेक को भुनाने का मौका भी नहीं छोड़ना चाहेगा। शांति तभी संभव है, जब दोनों पक्ष घुटना टेकने के बजाय घुटने मोड़ने की नीति पर चलें। यह अकारण नहीं है कि न्यूयार्क के मेयर ममदानी ने जंग पर दसियों अरब डालर फूंकने का विरोध किया है, मगर जिद्दी और खब्ती ट्रंप ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के फेर में ईरान की मुश्कें कसने के लिये कुछ भी कर सकते हैं, लिहाजा शांति की घड़ियां दूर हैं और तबाही सन्निकट।
…………..
