शांति समझौते पर बातचीत जारी: बड़ी डील होगी या फिर कोई डील नहीं होगी- ट्रम्प

वाशिंगटन / तेहरान ईरान-अमरीका के बीच शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर धीमी पड़ती दिख रही है। मांगों में गतिरोध के बीच सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान से बातचीत बहुत अच्छे से आगे बढ़ रही है। यह सभी के लिए या तो बहुत बड़ी डील होगी या फिर कोई डील नहीं होगी। हम वापस युद्ध के मैदान में होंगे और गोलियां चलेंगी। वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि समझौते की कोई अंतिम समयसीमा तय नहीं है। ईरान का लक्ष्य अपने राष्ट्रीय हित और अधिकारों की रक्षा करना है। अंतिम नतीजे की घोषणा तभी होगी, जब समझौता पूरा हो जाएगा।

गुप्त स्थान पर छिपे मोजतबा, कूरियर नेटवर्क के भरोसे

अमरीकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई एक गुप्त स्थान पर छिपे हैं। उनका दुनिया से संपर्क बेहद कम है। वह एक जटिल कूरियर नेटवर्क के जरिए संदेश अधिकृत ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाते हैं जिसमे काफी समय लगता है।

टोल नहीं, पर्यावरण शुल्क; एनपीटी से हटने की धमकी

ईरान-अमरीका की शांति वार्ता के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान ने कहा है कि वह टोल टैक्स नहीं वसूलेगा, लेकिन समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सेवाओं के लिए पर्यावरण टैक्स लगाया जाएगा। इस बीच सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान को धमकाया गया तो वह न्यूक्लियर नॉन प्रोलिफरेशन संधि (एनपीटी) से बाहर निकल सकता है।

ट्रंप ने चला अब्राहम समझौते का दांव

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर सोमवार को कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया में सऊदी अरब, यूएई, तुर्किए, कतर, इजिप्ट, जॉर्डन के प्रमुखों और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से भी फोन पर बात की है। उन्होंने इन देशों को अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर करने को कहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते के बाद वह उसे भी अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने को कहेंगे।

क्या है अब्राहम अकॉर्ड?

अब्राहम अकॉर्ड अमरीका की मध्यस्थता में 2020 में हुआ शांति समझौता है। इसका उद्देश्य इजराइल और अरब देशों के बीच पुरानी रंजिश को खत्म कर राजनयिक, आर्थिक व सुरक्षा संबंधों को सामान्य बनाना है। इसी समझौते के कारण 1994 के बाद पहली बार यूएई और बहरीन ने इजराइल को संप्रभु राष्ट्र के तौर पर स्वीकार किया।

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