कोल परिवहन से ईमलीछापर चौक पर जाम की समस्या, राहगीरों की बढ़ी परेशानी

कोरबा 08 अपै्रल। खदान में वाहनों के प्रवेश में देरी से फोरलेन सडक पर ईमलीछापर चौक के एक ओर वैशाली तक और दूसरे छोर पर आनंद नगर पुल तक कोल परिवहन में लगी गाडियों की कतार लग गई। इस कारण पेट्रोल टंकी के पास जाम लग गया। कुचौना मोड़ तक सडक बननी है। रोड के चौड़ीकरण के लिए चपेट में आ रही दुकानों को हटाया है, लेकिन इसके बाद से सडक निर्माण में देरी हुई है। वहीं पेट्रोल टंकी के पास संकरे पुलिया के कारण भारी वाहनों की सडक पर कतार लगने से आवाजाही में दिक्कतें हो रही है।

एसईसीएल कुसमुंडा खदान में भारी वाहनों की एंट्री में लेटलतीफी की वजह से भारी वाहनों के पहिए थम गए। इससे कुसमुंडा मुख्य मार्ग भारी वाहनों का पार्किंग यार्ड बन गया। फोरलेन सडक पर रोड किनारे खड़ी भारी वाहनों के कारण कुसमुंडा मुख्य मार्ग पर पेट्रोल टंकी के पास जाम लग गया। वहीं मुख्य मार्ग पर ईमलीछापर चौक के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। वैवाहिक सीजन का दौर होने से हल्दी समेत अन्य रस्म पूरी करने रिश्तेदारों के यहां परिवार समेत रवाना हुए लोग जाम में फंसने से परेशान हुए। एसईसीएल कुसमुंडा खदान में कोल परिवहन में लगे भारी वाहनों को फोरलेन सडक पर खम्हरिया के आगे माइंस के 6 नंबर बैरियर के साथ ही थाना चौक के पास से एंट्री मिलती है। फोरलेन सडक बनने के बाद 6 नंबर बैरियर के सामने दोनों ओर वैकल्पिक सड़कें होने पर राहगीरों को आवाजाही में परेशानी नहीं हुई। लेकिन यहां पर भी भारी वाहनों की कतारें लगी रही। ईमलीछार चौक से रेल फाटक पार करने के बाद थाना चौक के पास भारी वाहनों को कुसमुंडा खदान में एंट्री मिलती है। यहां पर भारी वाहनों में कोयला लोड के लिए एंट्री में देरी के कारण फोरलेन सडक से आवाजाही कर रहे राहगीरों की परेशानी बढ़ गई। मार्ग के पेट्रोल टंकी के पास संकरे पुलिया के कारण आवाजाही बाधित हुई। दोपहर की तेज धूप में जाम में फंसने से बाइक व चारपहिया वाहनों के चालक परेशान हुए। किसी तरह जाम से निकलकर जद्दोजहद करते हुए गंतव्य स्थल तक पहुंचे। बताया कि एसईसीएल कुसमुंडा माइंस में सर्वर की समस्या व स्टॉक मेजरमेंट की टीम की जांच के लिए पहुंचने से भारी वाहनों को देरी हुई।

जानकारी के अनुसार कोयला खदानों में मैनुअल बिलिंग की व्यवस्था बंद कर दी गई है। खदान से कोयला जब डिस्पैच के लिए वजन घर में जाता है तो वहां से वजन होते ही ऑनलाइन बिल जेनरेट हो जाता है। यह सेंट्रल सर्वर से नियंत्रित होता है। बिजली की एक कॉपी ग्राहक को भी मेल के माध्यम से मिल जाती है। इससे कोयले के डिस्पैच की जानकारी मिलती है। साथ ही कोयले की वजह व कीमत भी दर्शायी जाती है। शनिवार को 1 लाख 20 हजार टन कोयले का उठाव किया गया था। रेल के साथ ही सडक मार्ग से कोयले का परिवहन किया जाता है।

Spread the word