जिला अधिवक्ता संघ, कोरबा में बेतहाशा एवं अनधिकृत नामांकन शुल्क वृद्धि पर विरोध

कोरबा । जिला अधिवक्ता संघ, कोरबा में चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रत्याशियों से लिए जा रहे नामांकन शुल्क में लगातार एवं बेतहाशा वृद्धि को लेकर अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इसे न केवल अनुचित बल्कि अधिवक्ताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया है।

उन्होंने बताया कि तमाम विरोध के बावजूद अधिवक्ता संघ द्वारा नामांकन शुल्क में और अधिक वृद्धि कर दी गई है। वर्तमान में अध्यक्ष पद हेतु 15,000, उपाध्यक्ष पद हेतु 10,000, सचिव एवं अन्य पदों हेतु 7,000 तथा कार्यकारिणी सदस्यों के लिए भी 3,000 तक नामांकन शुल्क निर्धारित किया गया है, जो अत्यधिक एवं असंगत है।

धनेश कुमार सिंह ने कहा कि पूर्व में अध्यक्ष पद हेतु नामांकन शुल्क मात्र 1,000 था, जिसे बढ़ाकर 3,000 किया गया और फिर 10,000 कर दिया गया था, जबकि अब इसे बढ़ाकर 15,000 कर दिया गया है। इस प्रकार निरंतर वृद्धि से यह स्पष्ट होता है कि चुनाव प्रक्रिया को आम अधिवक्ताओं की पहुंच से दूर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह शुल्क वृद्धि न तो अधिवक्ता संघ की आमसभा द्वारा पारित की गई है और न ही निर्वाचित कार्यकारिणी द्वारा कोई प्रस्ताव पारित किया गया है। ऐसे में चुनाव अधिकारी द्वारा इस प्रकार शुल्क बढ़ाना पूर्णतः अनधिकृत एवं नियमविरुद्ध है।

उन्होंने कानूनी आधार पर कहा कि Advocates Act, 1961 एवं Bar Council of India Rules के अनुसार अधिवक्ता संगठनों की कार्यप्रणाली पारदर्शी, न्यायसंगत एवं लोकतांत्रिक होनी चाहिए, जबकि वर्तमान स्थिति इन सिद्धांतों के विपरीत है। तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक चुनावों में भी लोकसभा के सामान्य वर्ग के प्रत्याशी के लिए 25,000 तथा विधानसभा चुनाव हेतु 10,000 की जमानत राशि निर्धारित है, जबकि प्रेस क्लब जैसे संस्थानों में अध्यक्ष पद हेतु नामांकन शुल्क मात्र 1,000 रखा जाता है। धनेश कुमार सिंह ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने राज्य अधिवक्ता परिषद, छत्तीसगढ़ को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप एवं आवश्यक कार्यवाही की मांग की है।

उन्होंने मांग की है कि इस बेतहाशा एवं अनधिकृत नामांकन शुल्क वृद्धि पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा शुल्क को युक्तिसंगत एवं न्यायसंगत स्तर पर निर्धारित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक अधिवक्ता चुनाव प्रक्रिया में भाग लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ कर सकें।

Spread the word