व्यक्तित्व: जगतू माहारा विद्यालय जगदलपुर के गौरव – त्रिलोक महावर

विद्यालय के शताब्दी समारोह पर विशेष

जगतू माहारा शास बहु उ मा विद्यालय जगदलपुर ने अपनी स्थापना की 100 वीं वर्षगांठ 17 से 19 नवंबर तक मनाया है।

इस विद्यालय से एक शताब्दी में अनेक प्रतिभाओं ने विभिन्न क्षेत्रो में उपलब्धियां हासिल की है।ऐसी ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी समकालीन कविता, लघु कथा व कहानी लेखन में विशिष्ट स्थान रखने वाले त्रिलोक महावर ने 1971 से 1977 तक इस विद्यालय में अध्ययन किया।

15 दिसम्बर, 1960 को  उनका जन्म जगदलपुर के प्रताप गंज मुहल्ले में हुआ। उन्होने धरमपुरा शासकीय महाविद्यालय से एम काम किया।एल एल बी और हिंदी साहित्य में विशारद की शिक्षा ली।

कुछ समय तक धरमपुरा महाविद्यालय में अध्यापन किया एवं सरगुजा विश्वविद्यालय में कुलपति  रहे। प्रशिक्षण के लिये वे ड्यूक यूनिवर्सिटी, अमेरिका, सासंपो, फ्रांस भी गए।

*अभिरुचि :* उन्होनेबस्तर की लोक बोली हल्बी, जनजातीय तथा पर्यावरण, वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण, कला, पुरातत्व एवं इतिहास में विशेष अध्ययन एवं कार्य किया है। बाल कवितायेँ, संस्मरण, कहानी एवं लघुकथा पोस्टर्स पर कार्य, गायन, ज्योतिष, क्रिकेट, बैडमिन्टन व टेबल टेनिस में उनकी  रूचि है. चार दशकों से आकाशवाणी, दूरदर्शन में उनके विभिन्न कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहा है।

*वन्या एवं  बस्तर हाई स्कूल  की हस्तलिखित ज्ञानदीप* पत्रिका का संपादन के साथ साथ देश की प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं।

*अन्य गतिविधियाँ* : वे पर्यावरण सम्बन्धी संस्था बेसकॉन के संस्थापक सदस्य एवं कोषाध्यक्ष, रोट्रेक्ट क्लब के संस्थापक अध्यक्ष, नव आयाम साहित्यिक सांस्कृतिक मंच एवं तरुण साहित्य समिति में सचिव तथा विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों में  सक्रिय रहे हैं।

*रचना संसार*
*कविता संग्रह:* विस्मित न होना, नदी के लिए सोचो, इतना ही नमक, हिज्जे सुधारता है चाँद, शब्दों से परे, कविता का नया रूपाकार- त्रिलोक महावर की कविताओं पर विमर्श- संपादित, कविता आज के समय में -सम्पादित प्रमुख रचनायें हैं।

*सम्मान एवं पुरस्कार*
पं. मदन मोहन मालवीय स्मृति आराधक श्री सम्मान- नई  दिल्ली
अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति सम्मान-  मध्य प्रदेश।
थानखम्हरिया हिंदी साहित्य सम्मान।
बस्तर चेंबर ऑफ़ कॉमर्स जगदलपुर।
घनश्याम मुरारी श्रीवास्तव- पुष्प स्मृति शीर्ष सम्मान, साहित्य की बात विदिशा मध्य प्रदेश। कृति सम्मान- ग्वालियर- म.प्र.।
पंजाब कला साहित्य अकादमी सम्मान से वे सम्मानित हो चुके हैं।

त्रिलोक महावर प्रारंभ से ही मेधावी छात्र रहे। उन्होंने नवमी दसवीं कक्षा में अध्ययन करते हुए ही साहित्य विशारद की उपाधि प्राप्त कर ली थी। इसके अलावा उन्होंने अपने शाला का प्रतिनिधित्व करते हुए वाद- विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया और राजनांदगांव में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व भी किया। इसके अलावा उन्होंने बहुत सी प्रतियोगिताओं में लगातार भाग लिया और वह हमेशा प्रथम आते रहे। उस समय जगदलपुर में आकाशवाणी केंद्र भी खुला जहां पर उन्होंने लंबे समय तक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। इसके अलावा, अध्ययन काल से ही त्रिलोक महावर सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।

*संस्मरण*
जगदलपुर में उनके घर के सामने अभी भी क्रिकेट का ग्राउंड है। वही कीर्ति शेष सोमनाथ रथ जी का निवास था। वे ग्रीकसन हाई स्कूल, जिसका नाम बाद में जगतू माहारा शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हो गया था, में  प्राचार्य थे। एक बार यदि वे स्कूल के बरामदे में खड़े हो जाते तो किसी की हिम्मत नहीं थी पढ़ाई के दौरान बाहर कोई घूमता दिखे।

जितने कड़क और अनुशासन प्रिय वे थे, उतने ही संवेदनशील। सन 1975 में त्रिलोक महावर की उम्र 14 और 15 वर्ष के बीच की होगी, जब भारत सरकार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित एक प्रतियोगिता में उन्हें कविता, कहानी, निबंध और वाद- विवाद प्रतियोगिता में पुरस्कार मिले थे। तब तत्कालीन मंत्री श्री अरविंद नेताम ने स्कूल में आकर  पुरस्कृत किया था। उस समय का एक यादगार चित्र उनके पास सुरक्षित है, जिसमें कीर्ति शेष रथ जी और खेल प्रशिक्षक भी उसमें दिखाई दे रहे हैं। सदर स्कूल के श्री गणेश्वर आचार्य, सादिक खाँ  हाई स्कूल के सर्वश्री बी आर नायडू, बी एस बाजपाई, बी एल ओझा, डी  एल दुबे, मुद्लियार  जी एस एन  मिश्र और एच आर मरकाम-जैसे शिक्षक उन्हे मिलें, जिनका मिलना गर्व की बात है, जिनकी वजह से वे अपनी यात्रा के इस मुकाम पर हैं।

*सेवाएं –*
*पदस्थापना:* भारतीय प्रशासनिक सेवा छत्तीसगढ़ में, कलेक्टर धमतरी, जांजगीर-चाम्पा, मुंगेली। कमिश्नर सरगुजा, बिलासपुर एवं दुर्ग, छत्तीसगढ़ मंत्रालय में उप तथा अपर सचिव एवं सचिव ,
सचिव लोक आयोग, एम डी दुग्ध महासंघ तथा विभिन्न पदों पर वे  कार्यरत रहे। सम्प्रति वे संचालक, प्रशासन अकादमी, रायपुर में  पदस्थ हैं।

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