विज्ञान ‘भगवान का सहयोगी’ है, विज्ञान व अध्यात्म अलग नहीं है.! फ्रांस के दो गणितज्ञों का दावा

नई दिल्ली/लंदन. सदियों से यह सवाल पूछा जाता रहा है, क्या ईश्वर का अस्तित्व है? विज्ञान को अक्सर आस्था के खिलाफ खड़ा किया गया, लेकिन फ्रांस के दो गणितज्ञों का दावा है कि विज्ञान अब ईश्वर के पक्ष में सबूत दे रहा है। गणितज्ञ ओलिवियर बोन्नासीस (59) और मिशेल-इव बॉलोरे (79) की किताब ‘गॉड, द साइंस, द एविडेंसः द डान आफ ए रेवलूशन’ (भगवान, विज्ञान, साक्ष्यः एक क्रांति की शुरुआत) का तर्क है कि बिग बैंग, स्पेस-टाइम और ब्रह्मांड के सटीक पैरामीटर ईश्वर, किसी परम सत्ता या शक्ति की उपस्थिति का संकेत देते हैं। 2021 में फ्रांस में प्रकाशित इस किताब की चार लाख प्रतियां बिक चुकी है। ब्रिटेन और अमरीका में जल्द रिलीज होने जा रही है। सवाल यह है कि क्या 21वीं सदी का विज्ञान. उस ‘एक तत्व’ की ओर इशारा कर रहा है, जिसकी चर्चा ऋषि-मुनियों ने सहस्राब्दियों पहले कर दी थी?

लेखकों ने किताब में दिए तीन तर्क…

  1. हम ‘स्पेस-टाइम’ में जीते हैं, जहां समय, स्थान और पदार्थ गहरे जुड़े हैं।
  2. इसका एक आरंभ है।
  3. ब्रह्मांड इतनी बारीकी से संतुलित है कि जीवन की संभावना मात्र एक दिव्य संयोग घटने मात्र से संभव नहीं लगती।

विज्ञान ‘भगवान का सहयोगी’ है

किताब के लेखकों के मुताबिक कभी यह माना गया कि विज्ञान ईश्वर के खिलाफ खड़ा है, लेकिन अब पेंडुलम विपरीत दिशा में झूल चुका है। अब विज्ञान ‘भगवान का सहयोगी’ है। विज्ञान व अध्यात्म अलग नहीं है।

हमारे यहां विज्ञान और अध्यात्म साथ-साथ

वैज्ञानिक बिग बैंग को सृष्टि का प्रारंभ मानते हैं, भारतीय चिंतन में सृष्टि और प्रलय का यह चक्र निरंतर चलेता रहता है। उपनिषदों में ‘ब्रह्म’ को परम सत्ता बताया गया, जिससे सब उत्पन्न होता है। वेदांत कहता है, ‘यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते’ यानी जिससे सृष्टि उत्पन्न हुई, उसी में विलीन होगी। ऋग्वेद का ‘नासदीय सूक्त सृष्टि की उत्पत्ति पर कहता है, ‘नासदासीन्नो सदासीत्तदानीम्’ यानी तब न सत था, न असत, केवल ‘एक’ था। अद्वैत वेदांत से लेकर स्वामी विवेकानंद तक विज्ञान व अध्यात्म को विरोधी नहीं, पूरक बताते रहे हैं।

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