चैतन्य बघेल गए पांच दिनी रिमांड पर, कांग्रेस करेगी 19/07 को प्रदेश व्यापी प्रदर्शन, पुतला दहन

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ईडी द्वारा गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। आबकारी घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया गया। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने बड़ा निर्णय लेते हुए 19 जुलाई 2025 को प्रदेश व्यापी
ईडी के अनुसार, यह गिरफ्तारी सहेली ज्वेलर्स के संचालक लक्ष्मीनारायण उर्फ पप्पू बंसल के बयान के आधार पर की गई है। बंसल ने अपने बयान में दावा किया है कि आबकारी घोटाले में 100 करोड़ रुपये के लेन-देन में चैतन्य बघेल की भूमिका रही है। ईडी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में और भी कई कड़ियों को जोड़ने के लिए चैतन्य से विस्तृत पूछताछ जरूरी है।
गिरफ्तारी के बाद रायपुर स्थित ईडी दफ्तर की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन सतर्क है।

इस बीच कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है और विरोध का बिगुल फूंक दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने घोषणा की है कि 19 जुलाई को प्रदेश भर के सभी जिला मुख्यालयों में ईडी और केंद्र सरकार के खिलाफ पुतला दहन किया जाएगा। पार्टी ने सभी सांसदों, विधायकों, पार्षदों और पदाधिकारियों को इस प्रदर्शन में भाग लेने के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक विरोधियों को परेशान कर रही है। वहीं भाजपा नेताओं ने ईडी की कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया बताया है और कहा है कि जांच में जो भी दोषी होगा, उसे जवाब देना होगा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह मामला अब पूरी तरह गरमा चुका है। आने वाले दिनों में इस पर और घमासान होना तय माना जा रहा है।

कौन हैं चैतन्य बघेल?
चैतन्य बघेल छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे हैं. चैतन्य भी कांग्रेस से जुड़े हुए हैं, लेकिन राजनीति में अभी तक कदम नहीं रखा है. उनके पास फिलहाल कोई पद नहीं है. साल 2018 से 2023 के बीच में जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब चैतन्य बघेल राजनीति में आने का प्लान कर रहे थे, लेकिन फिर 2024 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार वापस नहीं आई.
लोकसभा चुनाव में जब भूपेश बघेल को कांग्रेस ने राजनांदगांव सीट से टिकट दिया तो अटकलें लगाई जा रही थीं कि उनकी विधानसभा सीट पाटन पर चैतन्य को टिकट मिलेगा. हालांकि, भूपेश बघेल के हारने के बाद ऐसा नहीं हो सका. इससे पहले चैतन्य बघेल रियल एस्टेट से जुड़े हुए थे. अब पारिवारिक खेती संभाल रहे हैं.

ED ने चैतन्य बघेल पर क्यों साधा निशाना?
छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और कोटा विधायक कवासी लखमा को गिरफ्तार किया जा चुका है. वहीं, रायपुर के पूर्व मेयर ऐजाज ढेबर के भाई, पूर्व IAS अफसर अनिल टूटेजा और आबकारी विभाग के पूर्व MD पर भी प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की है. ईडी को कथित तौर पर पता चला है कि शराब घोटाले का पैसा चैतन्य बघेल और उनके करीबियों की प्रॉपर्टी में निवेश किया गया है.

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?
भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल (साल 2018-23) के दौरान छत्तीसगढ़ में करीब 3200 करोड़ रुपये का शराब घोटाला सामने आया था. आरोप लगा कि घोटाले के सैकड़ों करोड़ रुपये से अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदी. चार्जशीट में बताया गया कि आरोपियों ने 61 लाख अवैध पेटी शराब बिकवाई है.
