खरसिया परमालकसा रेल लाइन मुआवजा घोटाला, मोदी सरकार के जांच आदेश में त्रुटि, 5 साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी जांच

दुर्ग जिले में अधिकारियों और भू माफिया ने रेलवे को 135 करोड़ का चूना लगाया, अब घोटाले के पैसों से जांच रुकवाया

रायपुर। भारतमाला की तर्ज पर खरसिया परमालकसा रेल लाइन के लिये भूमि अधिग्रहण के मुआवजा वितरण से पहले दुर्ग जिले में अधिकारियों और भू माफिया ने रेलवे को 135 करोड़ का चूना लगाने का खेल रचा। इस मामले का खुलासा होने के बाद जांच की कार्रवाई अफसरशाही के मकडजाल में उलझ गई है। रसूख और रिश्वत के दम पर रचे गए इस घोटाले की जांच करने की बजाय जिम्मेदार अफसर मामले को गोल-गोल घुमा रहे हैं। एक तरफ, भारतमाला मुआवजा घोटाले की जांच सभी जिलों में तेजी से हो रही है, वहीं रेल लाइन मुआवजा घोटाले की विधिवत जांच अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।

ऐसे की गई गड़बड़ी

5 सितंबर 2018 को खरसिया-दुर्ग-परमालकसा के बीच नई रेलवे लाइन के लिये राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद समाचार पत्रों में 3 अक्टूबर 2018 को प्रकाशन किया गया। अधिसूचना प्रकाशित होने के दो दिन के भीतर ही अफसरों ने भू माफिया को दुर्ग जिले से बिछने वाली रेललाइन के गांवों की लिस्ट लीक कर दी। भू अर्जन अधिनियम की धारा 11 के तहत रेलवे द्वारा भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना की धारा 20 ए के तहत प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद प्रभावित गांवों की भूमि की खरीदी बिक्री, नामांतरण, खाता विभाजन और नक्शा बंटवारा जैसी कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लग जाती है। इसके बावजूद भू-माफिया ने करीब 35 लोगों का संगठन बनाकर सितंबर 2018 में दुर्ग जिले के बोरीगारका, पुरई, घुघसीडीह जैसे गांवों के किसानों से 9 एकड़ जमीन खरीद ली। 9 एकड़ भूमि को 5 सौ वर्ग फीट के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर खाता विभाजन भी कर दिया गया। नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। नक्शा बंटवारा भी कर दिया गया। इसी तरह दुर्ग जिले के श्री रिद्धी सिद्धी बिल्डर की साढ़े 5 एकड़ जमीन को आनन-फानन में 5 सौ वर्ग मीटर के करीब 43 टुकड़े में बांटा गया। छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने से भूमि का मुआवजा कई गुना बढ़ाने की नीयत से नियम विरुद्ध ऐसे किया गया।

पीएमओ में शिकायत के बावजूद जांच अधिकारी का अता-पता नहीं

भ्रष्टाचार और अनियमितता के इस मामले की शिक्क्रायत प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, ईओडब्लू से लेकर संभागायुक्त और कलेक्टर से भी दोनों मामलों की जांच की मांग की गई। इसके बावजूदं गड़बड़ी की जांच अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। भारतमाला की तर्ज पर मामले का खुलासा करना तो दूर अब तक जांच अधिकारी भी नियुक्त नहीं किया गया है।

पीएमओ की एक और चूक

प्रस्तावित रेल लाइन के प्रभावित गांवों की भूमि की खरीदी बिक्री, नामांतरण, खाता विभाजन और नक्शा बंटवारा मामले में गड़बड़ी के आरोप तत्कालीन तहसीलदार जयंत बघेल और पटवारी राजेश बंजारी पर लग रहे हैं। शिकायतकर्ता रूपेश जैन का कहना है कि नियम विरुध्द सारे आदेश तहसीलदार ने ही दिये। लिहाजा मामले की जांच तहसीलदार से ऊपर रैंक के अफसर को ही करना चाहिये। तहसीलदार से जुड़े मामले की जांच एसडीएम या कलेक्टर सहित अन्य उच्चाधिकारी कर सकते हैं। नियमानुसार एक तहसीलदार के कारनामे की जांच दूसरा तहसीलदार नहीं कर सकता। इसके बावजूद पीएमओ द्वारा कंसर्न ऑफिसर के रूप में तहसीलदार को नियुक्त कर दिया। इसके कारण मुआवजे के मक़डज़ाल की गुत्थियां सुलझाने की कार्रवाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।

तहसील कार्यालय से दस्तावेज गायब

इस मामले में शिकायतकर्ता रूपेश जैन ने दुर्ग तहसीलदार कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत खाता विभाजन के दस्तावेजों की मांग मांगी। तहसील कार्यालय से जवाब मिला कि तहसील कार्यालय में दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। दस्तावेज गायब होने की शिकायत संभागायुक्त और कलेक्टर से की गई। कलेक्टर के निर्देश पर वर्तमान तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता ने तत्कालीन तहसीलदार और तत्कालीन पटवारी से दस्तावेज उपलब्ध कराने कहा। दोनों के जवाब एक-दूसरे को विवादों के कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

तत्कालीन तहसीलदार जयंत बघेल का कहना है कि उस समय (2018 में) नामांतरण की प्रक्रिया मैनुअल होती थी। मैनुअल पंजी में ही आदेश दर्ज होते थे। दस्तावेजों का संधारण भी पटवारी ही करते थे। मैनुअल नामांतरण पंजी में किये गए आदेश का पंजीयन किसी न्यायालय या केंद्रीय अभिलेखागार में नहीं होता था। आपसी सहमति नामा, इश्तिहार प्रकाशन की तिथि, शपथ पत्र, फर्द बंटवारा आदि सभी दस्तावेज तत्कालीन हल्का पटवारी के पास सुरक्षित रहते थे। पटवारी से ही दस्तावेज प्राप्त किये जा सकते हैं।

इधर, पटवारी का कहना है कि तत्कालीन तहसीलदार ने पर्छ बंटवारा नामांतरणं पंजी में पेश करने के निर्देश दिये। इसके परिपालन में पर्छ बंटवारा खातेदारों की सहमति से तैयार किया गया और न्यायालय तहसीलदार दुर्ग के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

पीएमओ की चूक या …

इस मामले की ऑनलाइन शिकायत 30 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई। शिकायत के आधार पर पीएमओ के पोर्टल में 17 अप्रैल 2025 को कसर्न ऑफिसर के रूप में प्रकाश टंडन को नियुक्त किया गया। पोर्टल में प्रकाश टंडन का पद तहसीलदार दुर्ग बताया गया। खास बात ये है कि तहसीलदार प्रकाश टंडन 7 साल पहले 28 जून 2018 को डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत हो चुके हैं। टंडन को दुर्ग तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत करते हुए कबीरधाम जिले में पोस्टिंग दी गई। वर्तमान में वे राजनांदगांव में पदस्थ हैं। पीएमओ को इस संबंध में अवगत कराने के बाद भी पीएमओ से नए जांच अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है।

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