कही-सुनी (20 SEPT-26) : रवि भोई

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दांवपेंच

लगता है पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। वे पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय तो दिखाई दे ही रहे हैं। राज्य की भाजपा सरकार को घेरने और सुर्ख़ियों में बने रहने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है छत्तीसगढ़ में राजनीति की धुरी भाजपा और भूपेश बघेल की बीच घूम रही है। पिछले दिनों भूपेश बघेल और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच प्रधानमंत्री आवास को लेकर प्रेस क्लब में खुली बहस हुई। ऐसा पहली बार हुआ। आमतौर पर चुनाव के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच डिबेट देखने को मिलते हैं। यह नया ट्रेंड है। इस डिबेट से उत्साहित होकर भूपेश बघेल ने अब तारा कोल ब्लाक आबंटन के मुद्दे पर बहस के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को चुनौती दे दी है। अब मुख्यमंत्री साय बहस के लिए भूपेश बघेल की चुनौती को स्वीकार करते हैं या फिर नजरअंदाज। इसका लोगों को इंतजार है। लोग कह रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपने राजनीतिक वजूद के लिए सरकार पर हमला जरुरी है। कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी पद से हटाकर असम भेज दिया है। असम में फिलहाल कोई ज्यादा काम नहीं है। वहां साढ़े चार साल बाद चुनाव होने हैं। कांग्रेस की सरकार भी नहीं है। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के पास कोई पद नहीं है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चा में बने रहने के लिए वे दांव पेंच चलेंगे ही।

भाजपा में अभी से भगदड़ क्यों ?

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को अभी दो साल से कुछ ज्यादा समय बचे हैं और पार्टी के कार्यकर्ता गुस्से में कदम उठाने लगे हैं। ताजा मामला रायगढ़ जिले के पुसौर नगर पंचायत का है। यहां के करीब आठ भाजपा पार्षदों ने नाली, बिजली और पानी जैसे मूलभूत समस्याओं का समाधान न होने के कारण रायगढ़ जिला भाजपा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया। अब इस्तीफा स्वीकार होता है या नहीं और पार्टी इस मुद्दे को कैसे सुलझाती है, यह तो समय बताएगा, लेकिन पार्षदों के इस्तीफे से नाराजगी झलकती है। पुसौर रायगढ़ विधानसभा में आता है, जहां से ओपी चौधरी विधायक हैं। आईएएस से राजनेता बने ओपी चौधरी अभी वित्त मंत्री हैं और उन्हें साय मंत्रिमंडल में ताकतवर मंत्री कहा जाता है। इसके बावजूद उनके विधानसभा क्षेत्र के एक नगर पंचायत के आठ भाजपा पार्षदों का गुस्सा और विकास के काम न होने का आरोप लगाना कई सवालों को जन्म देता है। कुछ महीने पहले बस्तर के बीजापुर विधानसभा के कुछ कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में जाने की खबरें आई थी। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ जिले में भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं के बगावती तेवर सुनने को मिले। आरंग विधायक और मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के भाई ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने की घटना को भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है।

सुबोध सिंह और निहारिका बारीक इसी साल बनेंगे एसीएस

1997 बैच के आईएएस सुबोध सिंह और निहारिका बारीक सिंह 2027 में 30 साल की सेवा पूरी कर लेंगे। इसके बाद अपर मुख्य सचिव के लिए पात्र हो जाएंगे, पर हल्ला है कि सरकार दोनों को नवंबर-दिसंबर में ही पदोन्नत कर सकती है। सुबोध सिंह अभी मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव और छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल के अध्यक्ष हैं, वहीं निहारिका बारीक सिंह प्रमुख सचिव गृह हैं। राज्य में अभी 1994 बैच के आईएएस मनोज पिंगुआ और ऋचा शर्मा एसीएस हैं। दोनों ही अफसर मुख्य सचिव विकासशील के बैच के है। बताते हैं कि मनोज पिंगुआ भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले थे, लेकिन अच्छी पोस्टिंग नहीं मिलने के कारण छत्तीसगढ़ में रुक गए। ऋचा शर्मा के भी प्रतिनियुक्ति पर जाने की खबरें उड़ती रहती हैं। मनोज पिंगुआ अभी वन विभाग के एसीएस हैं। ऋचा शर्मा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग संभाल रही हैं। आमतौर पर कृषि, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी एसीएस या फिर वरिष्ठ प्रमुख सचिव को सौंपी जाती है। छत्तीसगढ़ में तीनों महत्वपूर्ण विभाग अभी सचिव स्तर के अधिकारी संभाल रहे हैं।

चांदी काटने में लगे निगम अध्यक्ष

हल्ला है कि छत्तीसगढ़ के एक निगम अध्यक्ष इन दिनों चांदी काटने में लगे हैं। अध्यक्ष जी का निगम और विभाग इन दिनों सुर्ख़ियों में है, पर इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ये अपनी मस्ती में हैं। कुछ महीने पहले खबर उड़ी अध्यक्ष महोदय दिल्ली की राजनीति पर नजरें गड़ाए हुए हैं, दिल्ली की दौड़ में पीछे रह गए और कोई और बाजी मार ले गया। बताते हैं कि अध्यक्ष जी की नाभि भाजपा से नहीं जुड़ी है। पार्टी में हवाई लैंडिग करने वाले नेता होने के कारण ये अपनी ही राह चल पड़े हैं। अब देखते हैं भाजपा के कर्मठ और जमीन से जुड़े कार्यकर्ता अध्यक्ष जी को कब तक बर्दाश्त कर पाते हैं।

क्या अरुण साव पर ओवर बर्डन ?

कहा जा रहा है कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव पर ओवर बर्डन है। अरुण साव के पास लोक निर्माण, नगरीय निकाय और पी एच ई के साथ खेल एवं युवा कल्याण विभाग है। लोक निर्माण और पी एच ई तो निर्माण विभाग हैं। नगरीय निकाय विभाग भी जनता से सीधे जुड़ा विभाग होने के साथ-साथ निर्माण विभाग जैसा ही है। पी एच ई विभाग में जल जीवन मिशन के ठेकेदारों का भुगतान न होने का मुद्दा सुर्ख़ियों में है तो राज्य में सड़कें खराब होने की शिकायतें लगातार आ रही है। कहते हैं कि आमतौर पर सभी निर्माण विभाग एक ही मंत्री के पास नहीं होते है। विष्णुदेव साय की सरकार में लोक निर्माण और पी एच ई जैसे निर्माण विभाग उप मुख्यमंत्री अरुण साव के पास हैं, तो मुख्यमंत्री श्री साय ने जल संसाधन विभाग अपने पास रखा है।

विभागाध्यक्ष कार्यालय में बाहरी की सक्रियता

कहते हैं कि निर्माण विभाग से जुड़े एक विभागाध्यक्ष कार्यालय में बाहरी लोग सक्रिय हैं। दो लोगों की बड़ी चर्चा है। वही साहब से काम करवाते हैं। साहब तो किसी से मिलते नहीं हैं। साहब की भी उड़ के लगी है। कांग्रेस की सरकार में साहब को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। भाजपा की सरकार में रास्ता खोल दिया गया। साहब लंबी पारी खेलने वाले हैं। इसलिए उनके बारे में कोई कुछ नहीं बोलता। पर इस विभाग के कामकाज से जनता परेशान है। अब कुछ राजनेता भी चपेट में आने लगे हैं।

तीन स्पेशल डीजी के पद बनाने के मायने क्या होंगे ?

छत्तीसगढ़ में डीजी के तीन नए पद सृजित करने को लेकर बड़ा हल्ला है। अभी राज्य में चार डीजी हैं। इनमें एक डीजीपी अरुणदेव गौतम हैं। पवनदेव, हिमांशु गुप्ता और जीपी सिंह भी डीजी हैं। पर ये तीनों की पुलिस मुख्यालय से बाहर पोस्टिंग है। जीपी सिंह को पीएचक्यू में ट्रेनिंग का काम सौंपा गया है, पर कोई ख़ास जिम्मेदारी नहीं है। हल्ला है कि पवनदेव, हिमांशु गुप्ता और जीपी सिंह को दरकिनार करने के लिए तीन स्पेशल डीजी का पोस्ट बनाया जाय, जिससे प्रदीप गुप्ता और विवेकानंद को प्रमोट किया जा सके। वरिष्ठ होने के नाते एसआरपी कल्लूरी को भी फायदा मिल जाएगा। पर पुराने खिलाड़ी भी दांव पेंच में लगे हैं। प्रदीप गुप्ता और विवेकानंद स्पेशल डीजी बनते ही डीजीपी की दौड़ में शामिल हो जाएंगे। इससे पुराने दावेदारों का पत्ता कटने का खतरा है।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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