पवित्र श्रावण मास निकटः शिवालयों में तैयारियां प्रारंभ, धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा अंतिम चरण में

कोरबा 20 जुलाई। भगवान शिव की आराधना के पवित्र श्रावण मास के शुभारंभ में अब अधिक समय शेष नहीं है। इसे देखते हुए कोरबा नगर सहित उपनगरों और ग्रामीण अंचलों के प्रमुख शिवालयों में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मंदिर प्रबंधन समितियों की देखरेख में साफ-सफाई, रंग-रोगन, विद्युत व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े अन्य आवश्यक कार्य कराए जा रहे हैं।
श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं। इसी कारण मंदिर परिसरों को व्यवस्थित करने के साथ-साथ दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। कोरबा जिले में श्रावण मास के दौरान कनकेश्वर महादेव, हनुमानगढ़ (कटघोरा) तथा शंकरकोल्हा (कोरकोमा) सहित कई प्रसिद्ध शिवालयों में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व रहता है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा आसपास के जिलों से भी शिवभक्त पवित्र नदियों और जलस्रोतों से जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए इन मंदिरों तक पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। इन यात्राओं में हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता रहती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी श्रावण मास को लेकर धार्मिक वातावरण बनने लगा है। गांव-गांव में मंदिरों की साफ-सफाई और सजावट का कार्य प्रारंभ हो चुका है। कई स्थानों पर पूरे श्रावण मास में रामचरितमानस पाठ, शिव महिम्न स्तोत्र, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन, महामृत्युंजय जाप तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए आयोजन समितियां तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।
मंदिर समितियों का कहना है कि श्रावण मास भगवान शिव की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसलिए श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन और स्थानीय समितियां भी प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर आवश्यक तैयारियां कर रही हैं।
