क्या अब टिकट की दावेदारी भी आर्थिक क्षमता से तय होगी ? 2 लाख पार्टी फंड और खाते में 20 लाख की शर्त पर धनेश कुमार सिंह ने उठाए सवाल

कोरबा, 26 सितंबर। विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी को लेकर कांग्रेस की नई आर्थिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा है कि लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का रास्ता आम जनता के लिए खुला होना चाहिए, उसे आर्थिक क्षमता की कसौटी से सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में विधानसभा टिकट के दावेदारों से 2 लाख पार्टी फंड में जमा करने तथा बैंक खाते में 20 लाख की राशि दिखाने की व्यवस्था लागू किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार खाते में दिखाई गई 20 लाख की राशि निकालने की अनुमति भी नहीं होगी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए धनेश कुमार सिंह ने कहा कि “यदि किसी सामान्य परिवार से आने वाला व्यक्ति वर्षों से जनता के बीच काम कर रहा है, लेकिन उसके पास 20 लाख की बैंक जमा राशि नहीं है, तो क्या केवल इसी वजह से उसकी राजनीतिक दावेदारी समाप्त हो जाएगी?”

उन्होंने कहा कि राजनीति में आने के लिए व्यक्ति की जनसेवा, जनसमर्थन, सामाजिक सरोकार, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता महत्वपूर्ण होनी चाहिए। आर्थिक रूप से सक्षम होना अपने आप में जनप्रतिनिधि बनने की योग्यता का प्रमाण नहीं हो सकता।

धनेश कुमार सिंह ने कहा कि 2 लाख की गैर-वापसी योग्य राशि और खाते में 20 लाख रखने जैसी शर्तें यदि वास्तव में दावेदारी की अनिवार्य पात्रता बनती हैं, तो पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य क्या है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन योग्य लोगों को राजनीतिक अवसर कैसे मिलेगा।

उन्होंने सवाल उठाया-
“क्या लोकतंत्र में टिकट उस व्यक्ति को मिलना चाहिए जिसके पास अधिक पैसा है, या उस व्यक्ति को जिसके पास जनता का अधिक विश्वास है?”

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को यह ध्यान रखना चाहिए कि राजनीति केवल पूंजीपतियों और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों का क्षेत्र न बन जाए। गांव का सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी अथवा सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार का व्यक्ति भी चुनाव लड़ने और जनता का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार रखता है।

धनेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि पार्टी संगठन के संचालन के लिए आर्थिक सहयोग लेना चाहती है तो वह अलग विषय है, लेकिन टिकट की दावेदारी के लिए आर्थिक क्षमता को अनिवार्य शर्त बनाना लोकतांत्रिक भागीदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि इस व्यवस्था पर स्पष्ट और सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन योग्य और जनसमर्थित व्यक्तियों के लिए भी राजनीतिक अवसर खुले रहें।

धनेश कुमार सिंह ने कहा-
“लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी पूंजी होनी चाहिए। यदि राजनीतिक दावेदारी की पहली कसौटी बैंक खाते में लाखों रुपये हो जाए, तो फिर आम आदमी राजनीति में अपनी भागीदारी कैसे सुनिश्चित करेगा? इस प्रश्न का जवाब राजनीतिक दलों को जनता के सामने देना चाहिए।”

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