ओमान से गुजरात के तट तक अरब सागर के नीचे 2000 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी में है- भारत

नई दिल्ली. मध्यपूर्व में बढ़ते भू- राजनीतिक तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में आपूर्ति बाधित होने के खतरों के बीच भारत अब ओमान से गुजरात के तट तक अरब सागर के नीचे 2000 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी में है।
लगभग 40000 करोड़ रुपए की लागत वाली यह ‘मिडिल ईस्ट-इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन’ (एमईआईडीपी) भारत को खाड़ी देशों के विशाल गैस भंडारों से सीधे जोड़ देगी। गौरतलब है कि कच्चे तेल के विपरीत, भारत के पास प्राकृतिक गैस का कोई ‘सामरिक भंडार’ नहीं है, जो इस पाइपलाइन को जरूरी बनाता है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए गेम चेंजर
भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का लगभग 60% इसी रास्ते से आयात करता है। इस मार्ग के बाधित होने से न केवल आपूर्ति प्रभावित हुई है, बल्कि सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। प्रस्तावित सब-सी (समुद्र की सतह से नीचे) पाइपलाइन इस जोखिम को पूरी तरह खत्म कर देगी।
विशेषताएं
लंबाई और मार्ग: 2000
किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, जो ओमान और यूएई के रास्ते सीधे गुजरात तट को जोड़ेगी।
समय सीमाः मंजूरी मिलने के बाद
इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में 5 से 7 साल का समय लगेगा।
गहराई : समुद्र के नीचे 3450 मीटर की अधिकतम गहराई, जो आधुनिक डीप-सी तकनीक से संभव है।
क्षमताः यह पाइपलाइन प्रतिदिन
लगभग 31 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर्स पर डे प्राकृतिक गैस के परिवहन में सक्षम होगी।
रणनीतिक लाभः समुद्री मार्ग की रुकावटें बाधा नहीं बनेंगी।
इंजीनियरिंग का चमत्कार होगी यह पाइपलाइन
यह परियोजना इंजीनियरिंग का एक चमत्कार होगी। समुद्र में लगभग 3450 मीटर की गहराई पर बिछाई जाने वाली यह पाइपलाइन दुनिया की सबसे गहरी गैस पाइपलाइनों में से एक होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय गेल, इंजीनियर्स इंडिया और आईओसी जैसी दिग्गज कंपनियों को फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपने वाला है।
