पेंशनर्स फेडरेशन के संयुक्त आंदोलन के तहत कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, लंबित मुद्दों पर त्वरित निर्णय की मांग की

कोरबा। मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ संयुक्त राज्य पेंशनर्स फेडरेशन के संयुक्त आंदोलन के तहत जिला कोरबा में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। फेडरेशन ने यह ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित करते हुए पेंशनरों से जुड़े लंबित मुद्दों पर त्वरित निर्णय की मांग की। यह कार्रवाई 10 सितंबर 2025 को जबलपुर में फेडरेशन की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप की गई।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि विधानसभा चुनाव से पूर्व “मोदी की गारंटी” के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई राहत (डीआर) देने का आश्वासन दिया गया था, किंतु सरकार बने दो वर्ष बीतने के बाद भी इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ। फेडरेशन ने मांग की कि राज्य शासन शीघ्र निर्णय लेकर देय तिथि से डीआर भुगतान सुनिश्चित करे।

पेंशनरों ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49(6) की कथित गलत व्याख्या से मध्यप्रदेश से सहमति के कारण डीआर भुगतान में हो रहे विलंब की परंपरा समाप्त करने की मांग की। सितंबर 2006 से पूर्व की व्यवस्था बहाल कर नियमित कर्मचारियों के साथ पेंशनरों को भी डीआर देने का आग्रह किया गया।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि रजिस्ट्रार जनरल के आंकड़ों के अनुसार शहरी नागरिकों की औसत आयु लगभग 70 वर्ष है, ऐसे में 80 वर्ष के बाद 20% पेंशन वृद्धि का नियम अप्रासंगिक है। इसलिए 70 वर्ष पूर्ण करने पर 20% वृद्धि लागू की जाए। साथ ही, पेंशनरों के लिए मान्यता प्राप्त अस्पतालों में ओपीडी एवं इनडोर कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू करने की मांग की गई।

अन्य प्रमुख मांगों में तीर्थ यात्रा योजना में पेंशनरों को शामिल करना, वरिष्ठ नागरिक आयोग का गठन, पेंशनर कल्याण मंडल को क्रियाशील करना, रेल यात्रा में छूट, आयकर में राहत, पेंशनर के निधन पर आश्रित को ₹50,000 अग्रिम सहायता, पुरानी पेंशन योजना की बहाली तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश (पिटीशन क्रमांक 1654/2022, निर्णय दिनांक 02.09.2025) के अनुरूप छठवें वेतन आयोग के एरियर्स व सातवें वेतनमान के शेष एरियर्स का भुगतान शामिल है।

एन.के.राजवाडे़ अध्यक्ष छ.ग.प्रगतिशील पेंशन कल्याण संघ कोरबा, प्रभात शर्मा अध्यक्ष छ.ग. अधिकारी कर्मचारी पेंशन एसोसिएशन कोरबा तथा आर. के. शर्मा अध्यक्ष पेंशनधारी कल्याण संघ कोरबा
फेडरेशन ने मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा जताई  है।

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