इंजीनियर की नौकरी छोड़ गौरव ने डेयरी क्षेत्र को अपनाया, दूसरों को दिया रोजगार

कोरबा 24 मार्च। रोजगार के मामले में दूसरों पर निर्भरता में कई प्रकार की परेशानियां होती हैं और स्वतंत्रता की कमी भी महसूस होती है। कई प्रकार की झंझट अलग से पेश आती है। इसलिए पावर सिटी कोरबा के गौरव यादव ने सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल की अच्छी खासी वेतन वाली नौकरी को किनारे कर दिया। अब उन्होंने डेयरी फार्मिंग को चुना, और इसके जरिये हर महीने अच्छी आमदनी कर रहे हैं।

उनकी सफलता ने दूसरे युवाओं को इस तरफ बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री करने के बाद गौरव दक्षिण भारत के साइबर सिटी हैदराबाद चले गए। उम्मीद थी कि कंप्यूटर की अच्छी डिग्री होने और सॉफ्टवेयर इंजीनियर के जरिए वे बेहतर विकल्प प्राप्त कर सकेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं । उन्हें रोजगार मिला तो भी केवल 45,000 रुपये महीने की आमदनी हो रही थी । लेकिन समस्याएं अलग-अलग प्रकार की थी और लगातार ऐसे पचड़े बढ़ते जा रहे थे। असंतुष्ट होकर उन्होंने कुछ दिनों में अपनी मानसिकता बदली। अपने गृहजिले की ओर रुख करने एवं कुछ नया करने का सोचा। उनके घर में पहले से ही 4 गायें थीं, जिनसे उन्होंने डेयरी फार्मिंग की शुरुआत की। वर्तमान स्थिति में गौरव के पास देसी और विदेशी नस्ल की कुल 42 गायें हैं। इन गायों के दूध से वे हर महीने लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये कमा रहे हैं।यह उनकी कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम है।

गौरव ने बताया कि उन्हें नौकरी में सीमित आय महसूस हो रही थी। इसलिए उन्होंने डेयरी फार्मिंग का बिजनेस शुरू करना तय किया। शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गौरव डेयरी फार्मिंग में आने वाले युवाओं को संयम रखने की सलाह देते हैं।उनका मानना है कि इस बिजनेस को शुरू करने वाले युवाओं को कम से कम 2 साल तक मुनाफे की चिंता नहीं करनी चाहिए। पहले गायों की सेवा करें और उन्हें समझें. 2 साल बाद बिजनेस स्थिर हो जाएगा और आपको खर्च और बचत का अंदाजा होने लगेगा। गौरव यादव की कहानी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो कुछ अलग करना चाहते हैं. उन्होंने साबित किया है कि अगर लगन और मेहनत से काम किया जाए तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है।उनकी सफलता से यह भी पता चलता है कि खेती-किसानी और डेयरी फार्मिंग आज भी एक आकर्षक और लाभदायक व्यवसाय हो सकता है।

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