नाटो को रूस- यूक्रेन युद्ध की वजह क्यों बता रहे हैं राष्ट्रपति ट्रम्प..?

वॉशिंगटन | नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) 32 देशों का सैन्य गठबंधन है। सोवियत संघ के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए 1949 में इसकी स्थापना की गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नाटो को यूक्रेन युद्ध की वजह बताते हैं। उनका दावा है कि अगर यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की बात न होती तो रूस यूक्रेन पर हमला नहीं करता। विस्तार से समझते हैं…

  • नाटो की स्थापना क्यों हुई, इसका मूल उद्देश्य क्या?

1949 में अमेरिका, कनाडा और 10 यूरोपीय देशों ने नाटो की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की रक्षा सुनिश्चित करना व सोवियत संघ के विस्तार को रोकना था। इसका मुख्य सिद्धांत सामूहिक रक्षा (कलेक्टिव डिफेंस) है, यानी अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो बाकी सभी सदस्य देश उसकी रक्षा करेंगे।

  • यूक्रेन युद्ध में नाटो का क्या कनेक्शन है?

2014 में रूस ने क्राइमिया पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद यूक्रेन ने सुरक्षा के लिए नाटो से नजदीकी बढ़ानी शुरू की। 2020 के अंत से अमेरिका व यूरोपीय देश उसे नाटो में जोड़ने की बात भी कहने लगे। इस बीच 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया।

  • ट्रम्प नाटो को युद्ध के लिए क्यों जिम्मेदार मानते हैं?

ट्रम्प का कहना है कि रूस लंबे समय से नाटो के विस्तार को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है। उनका मानना है कि अमेरिका को नाटो के तहत यूरोप की रक्षा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यूरोपीय देश खुद अपने रक्षा बजट में पर्याप्त योगदान नहीं देते।

  • नाटो के बजट में अमेरिका की कितनी हिस्सेदारी ?

2024 में नाटो का बजट 31 हजार करोड़ रु. था। इसमें अमेरिका का 16% (करीब 5 हजार करोड़) योगदान था। जर्मनी का भी योगदान अमेरिका के बराबर है। इसके बाद ब्रिटेन-11% फ्रांस-10.5% व इटली 8.1% हैं।

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