धान खरीदी का कमीशन 8.99 करोड़ एक साल से अटका, कर्मियों को वेतन नहीं

समितियों के विभिन्न कार्यों पर प्रतिकूल असर

कोरबा 27 फरवरी। सरकार से लेकर पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मियों को वेतन देने के लिए एक अवधि निर्धारित है। ऐसा नहीं होने पर समस्याएं खड़ी हो जाती है। इसके ठीक उल्टे कोरबा जिले की सहकारी समितियों के कर्मचारी वेतन के लिए तरस रहे हैं वह भी लगभग 7 महीने से। पिछले वर्ष धान खरीदी के कमीशन की राशि जारी नहीं करने से यह समस्या बनी हुई है। इसके चलते समितियों के विभिन्न कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

कोरबा जिले में वर्तमान में 41 समितियों के अंतर्गत 65 उपार्जन केंद्र संचालित हो रहे हैं। सरकार की योजना के अंतर्गत यहां धान उपार्जन के साथ-साथ दूसरे कार्य संपादित कराए जाते हैं। इनमें पीडीएस का काम भी शामिल है। सरकार की योजना के अंतर्गत आदिवासी सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से प्रतिवर्ष समर्थन मूल्य पर धान और अन्य अनाज की खरीदी कराई जाती है। ऐसे मामलों में जहां किसानों को उनकी उपज का मूल्य दिया जाता है वहीं समितियां प्रति क्विंटल 31 रुपए के हिसाब से कमीशन प्राप्त करने की पात्रता रखती है। इसके माध्यम से उनके अधिकांश खर्च समायोजित होते हैं।

बताया गया कि वर्ष 2024-25 में कोरबा जिले में 29 लाख क्विंटल धान का उपार्जन समितियों के स्तर पर हुआ। 31 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन की राशि की गणना की जाए तो यह 8 करोड़ 99 लाख होती है, जिसका भुगतार अब तक समितियों को नहीं किया गया है जबकि दूसरे सीजन की खरीदी 31 जनवरी 2025 को बंद हो चुकी है।कमीशन की राशि को लेकर अलग-अलग स्तर पर पूरी जानकारी उपर भेजी जा चुकी है और कई मौके पर ध्यानाकर्षण कराया जा चुका है कि इसका भुगतान अविलंब कराया जाए ताकि व्यवस्थाएं सही तरीके से संचालित हो सके। इन सबके बावजूद जिला केंद्रीय सहकारी बैंक बिलासपुर इस मामले में अनावश्यक विलंब कर रहा है जिसके चलते दिक्कतें खड़ी हो गई है। खबर के अनुसार कोरबा जिले में कमीशन की राशि के नहीं आने से लगभग 7 महीने से सहकारी समिति पर केंद्रित सैकड़ों कर्मियों को वेतन देना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्हें अपनी जमा पूंजी का उपयोग इस मामले में करना पड़ रहा है, इसके चलते व्यवस्थाएं बिगड़ रही है। बताया गया कि सहकारी समितियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उपलब्ध होने वाली सामाग्री के मामले में बारदाने पर भी राशि प्राप्त होती है। जिले से इसका पूरा ब्यौरा दिया जा चुका है लेकिन इस मामले में भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। समितियां चाहती हैं कि उनके आर्थिक हितों का संरक्षण करने के लिए अविलंब कार्यवाही की जाए।

जानकारी के अनुसार सहकारी समितियां को कमिश्न और प्रोत्साहन की राशि अंतिम रूप से आवंटित करने की जिम्मेदारी जिला सहकारी बैंक बिलासपुर को है। सभी प्रकार की प्रक्रिया इस मामले में कोरबा जिले से की जा चुकी है इसके बावजूद बिलासपुर प्रबंधन की ओर से धनराशि आवंटित करने अब तक उदासीनता बरती जा रही है। इसके कारण कर्मचारी परेशान है और उनमें असंतोष है। सहकारी समितियों के मामले में वर्ष 2024 की धान खरीदी को लेकर कमीशन की राशि मार्कफेड की ओर से जारी कर दी गई है। अगली प्रक्रियाएं क्यों बाधित हैं, यह हमारा विषय नहीं है।
जान्हवी लिल्हारे, जिला विपणन अधिकारी

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