कार्तिक में मौसम परिवर्तन के साथ बदले खानपानः डॉ. नागेंद्र

कोरबा, 31 अक्टूबर। कार्तिक मास 27 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 24 नवंबर तक रहेगा। इस अवधि में मौसम में बदलाव के साथ शरीर की प्रकृति पर भी प्रभाव पड़ता है। लोगों को इस दौरान आहार-विहार और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना होगा। ऋतु परिवर्तन के कारण उन्हें कुछ चीजों के प्रयोग से बचना होगा और कुछ का उपयोग करने की मानसिकता बनानी होगी।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने लोगों को सलाह दी कि सूर्य की किरणों के तेज होने के कारण पित्त शामक, पौष्टिक और शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना उचित होगा। विशेष रूप से मधुर, तिक्त और कषाय रस वाले हल्के एवं स्निग्ध आहार का सेवन लाभकारी माना गया है। कार्तिक मास में मूली और आंवले, जिमीकंद को भी इस माह के आहार में अवश्य शामिल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस माह में रसायन के रूप में च्यवनप्राश तथा हरीतकी का सममात्रा में शर्करा के साथ सेवन करना उचित होगा। कद्दू, परवल, लौकी, नारियल तेल, देशी गाय का घी, मक्खन, दूध, देशी मिश्री, खांड, मुरब्बा, गुलकंद, मुनक्का और किशमिश जैसे खाद्य पदार्थों का उपयोग करने से स्वास्थ्य बेहतर होगा। जबकि मऋा (छाछ) और दाल के सेवन से लोगों को बचना चाहिए। इस दौरान अम्ल, लवण और कटु रस वाले खाद्य पदार्थों के साथ अधिक तेल, मिर्च-मसाले से बने भोजन से भी बचने की जरूरत है।
दैनिक जीवनशैली पर भी ध्यान देना जरूरी है। कार्तिक मास में धूप, ओस और पूर्वी हवाओं के सीधे संपर्क से बचना चाहिए। दिन में सोने, भूख नहीं लगने पर भोजन करने और आवश्यकता से अधिक व्यायाम करने से भी परहेज करना चाहिए। मौसम के अनुरूप संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाकर स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल की जा सकती है।
