छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू हो सकती है धान खरीदी, 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा का प्रस्ताव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में इस बार भी 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। धान खरीदी नीति को लेकर 27 अक्टूबर को प्रस्तावित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला हो सकता है। हालांकि, खरीदी की तारीख, लक्ष्य और नियमों की अंतिम पुष्टि सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।
प्रस्तावित व्यवस्था में किसानों के पंजीयन, टोकन प्रणाली, बायोमेट्रिक सत्यापन और खरीदी केंद्रों की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपने भूमि रिकॉर्ड, पंजीयन और बैंक खाते से संबंधित जानकारी दुरुस्त करा लें।
15 नवंबर से 31 जनवरी तक धान खरीदी का प्रस्ताव
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित है। इस बार भी प्रदेश में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखे जाने की जानकारी सामने आई है।
पिछले खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में भी प्रदेश में 15 नवंबर से 31 जनवरी तक धान खरीदी की गई थी। हालांकि, आगामी सीजन के लिए तारीख और लक्ष्य की आधिकारिक पुष्टि नई खरीदी नीति जारी होने के बाद ही होगी।
21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान खरीदी का प्रस्ताव
प्रस्तावित नीति के तहत किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदने की व्यवस्था जारी रखने की बात कही जा रही है। हालांकि, वास्तविक खरीदी की सीमा राजस्व विभाग द्वारा निर्धारित औसत उपज के आधार पर तय की जा सकती है।
यदि किसी किसान की भूमि के लिए निर्धारित औसत उपज 21 क्विंटल प्रति एकड़ से कम होती है, तो खरीदी की सीमा उसी के अनुसार निर्धारित हो सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक उत्पादन के अनुरूप धान खरीदी करना और अनियमितताओं पर रोक लगाना है।
धान का MSP कितना मिलेगा?
केंद्र सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अनुसार धान की दरें इस प्रकार हैं:
- सामान्य धान: 2,441 रुपये प्रति क्विंटल
- ग्रेड-A धान: 2,461 रुपये प्रति क्विंटल
ये केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य हैं। छत्तीसगढ़ में कृषक उन्नति योजना के तहत मिलने वाली अतिरिक्त राशि और भुगतान की शर्तें राज्य सरकार की नीति पर निर्भर करेंगी। किसानों को कुल कितनी राशि मिलेगी, इसकी पुष्टि संबंधित सरकारी आदेश जारी होने के बाद होगी।
टोकन के बिना धान बेचने में हो सकती है परेशानी
धान खरीदी केंद्रों पर उपज बेचने के लिए टोकन व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। इसके माध्यम से किसानों को निर्धारित तारीख पर संबंधित खरीदी केंद्र में धान बेचने का अवसर मिलता है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पंजीयन और टोकन से संबंधित नियमों की जानकारी समय रहते प्राप्त कर लें।
इसके अलावा, खरीदी केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, धान की गुणवत्ता की जांच और रिकॉर्ड का सत्यापन भी महत्वपूर्ण हो सकता है। नई नीति जारी होने के बाद इन व्यवस्थाओं से जुड़े विस्तृत नियम स्पष्ट होंगे।
किसानों को अभी क्या करना चाहिए?
धान खरीदी शुरू होने से पहले किसान अपने जरूरी दस्तावेजों की जांच कर लें। भूमि रिकॉर्ड और किसान पंजीयन में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर समय रहते सुधार कराएं। साथ ही, बैंक खाते की जानकारी सही रखें और टोकन जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित आधिकारिक निर्देशों पर नजर बनाए रखें।
