राहुल गांधी और प्रियंका पर अब दर्ज हुई पुलिसकर्मियों से मारपीट की FIR, ड्यूटी में बाधा डालने का भी आरोप

नईदिल्ली, 09 अक्टूबर । मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े कांग्रेस सांसद एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत प्रियंका वाड्रा पर गुरुवार को दूसरी एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस सूत्रों के हवाले से यह बताया जा रहा है कि उन पर आरोप है कि राजधानी में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों से कथित रूप से मारपीट करते हुए कर्तव्य में बाधा डालने का कृत्य किया है।वहीं, बुधवार को दोनों भाई-बहन पर आकाशवाणी में जबरन घुसकर अराजकता करने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला बुधवार को जनपथ और जंतर-मंतर के आसपास हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घटी घटनाओं के सिलसिले में दर्ज किया गया है। इस प्रदर्शन में भाग लेने वाले कई अन्य कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। बुधवार को विपक्षी गठबंधन इंडी के नेताओं ने जनपथ स्थित एक दक्षिण भारतीय रेस्टोरेंट में दोपहर के भोजन के बाद जंतर-मंतर की ओर अचानक धरना देने के लिए मार्च निकाला। जब पुलिस ने विपक्षी सांसदों की बसों को रास्ते में ही रोक दिया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिसकर्मियों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की देखने को मिली।प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य महिला नेताओं के साथ हाथ में संविधान की कॉपी लेकर सडक़ पर ही लेट गईं। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने उन्हें और अन्य नेताओं को सडक़ से हटाकर हिरासत में लिया।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रदर्शन के दौरान कुल 91 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें कई सांसद और वरिष्ठ विपक्षी नेता शामिल थे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में यह प्रदर्शन किया जा रहा था। इस दौरान कांग्रेस, टीएमसी, सीपीआई-एम, सीपीआई, आरजेडी और आईयूएमएल समेत कई प्रमुख दलों के सांसद मौजूद थे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज और साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढऩे से रोका गया था। इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और बल प्रयोग की घटनाओं की गहनता से समीक्षा की जा रही है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने बिना आवश्यक अनुमति के सडक़ जाम कर सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया।
