किसान सभा का 6वां राज्य सम्मेलन सूरजपुर में संपन्न

कोरबा, 8 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ किसान सभा का 6वां राज्य सम्मेलन 6-7 अक्टूबर को सूरजपुर में नई राज्य समिति के निर्वाचन के साथ संपन्न हुआ। 25 सदस्यीय राज्य समिति के प्रशांत झा अध्यक्ष, कपिल पैकरा सचिव और वकील भारती कोषाध्यक्ष चुने गए। उपाध्यक्ष संजय पराते, ऋषि गुप्ता, संयुक्त सचिव रफीक कुरैशी, बलबीर नागेश, कार्यकारिणी सदस्य दीपक साहू, दामोदर श्याम, जय कौशिक, राजकुमारी बिंझवार (कोरबा), दिलसाय नागेश, सोनू साय (सरगुजा), माधो सिंह, वेदनाथ राजवाड़े, बसंती देवी विश्वकर्मा (सूरजपुर), बिफन नागेश, किरण नागेश (बलरामपुर), देवान सिंह मार्को, जितेन साहू (मरवाही), वनमाली प्रधान (रायगढ़) शामिल हैं। राज्य समिति के गठन में युवाओं के जोश और वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का मिश्रण भी झलकता है।
विभिन्न स्थानों से आए किसानों की एक विशाल रैली के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसने पूरे शहर का भ्रमण किया। रैली में शामिल किसान फसल की सकल लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिए जाने, महंगाई पर लगाम लगाने और प्रदेश में हो रही किसान आत्महत्याओं को रोकने, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी के जिम्मेदार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, ग्रामीणों और किसानों की जमीन हड़पने और उन्हें विस्थापित करने की चालों पर रोक लगाने और मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। रैली के बाद वरिष्ठ किसान नेता माधो सिंह द्वारा झंडारोहण किए जाने और शहीद वेदी पर प्रतिनिधियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित किए जाने के बाद सम्मेलन प्रारंभ हुआ।
सम्मेलन की अध्यक्षता संजय पराते, ऋषि गुप्ता, वनमाली प्रधान, माधो सिंह, गंगोत्री निषाद के अध्यक्षमंडल ने की। किसान सभा के राज्य सचिव कपिल पैकरा ने सम्मेलन के समक्ष राजनैतिक-सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने देश-दुनिया की राजनैतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए मोदी सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को कुचलने की उसकी मुहिम तथा उसके सांप्रदायिक -फासीवादी मंसूबों का विस्तार से जिक्र किया। रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में गहराते कृषि संकट को भी उन्होंने रेखांकित किया तथा इसके लिए किसान समुदाय की व्यापक लामबंदी पर जोर दिया।
