कोल लेवी घोटाला: 9500 पन्नों के छठे पूरक चालान में बड़ा खुलासा, 12 आरोपियों की भूमिका, हर टन कोयले पर 25 रुपए वसूली का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित 500 करोड़ रुपए से अधिक के कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने सोमवार को बड़ा कदम उठाते हुए करीब 9500 पन्नों का छठा पूरक चालान विशेष न्यायालय में पेश किया। चालान में 12 आरोपियों की कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है। EOW के अनुसार, कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से हर टन पर 25 रुपए की कथित अवैध वसूली की जाती थी।
जांच एजेंसी का दावा है कि वसूली की रकम का इस्तेमाल राजनीतिक और निजी गतिविधियों के अलावा जमीन, फ्लैट और वाशरी में निवेश के लिए किया गया। जांच में कथित वसूली व्यवस्था को संचालित करने और रकम के लेन-देन से जुड़े कई डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य भी सामने आने की बात कही गई है।
15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद शुरू हुआ कथित वसूली सिस्टम
EOW की जांच के मुताबिक, 15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी अनिवार्य की गई थी। एजेंसी का आरोप है कि इसी व्यवस्था का इस्तेमाल कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपए की कथित अवैध वसूली के लिए किया गया।
जांच के अनुसार, अलग-अलग जिलों से रकम रायपुर पहुंचाई जाती थी। यहां रकम का हिसाब रखा जाता था और इसके बाद कथित सिंडिकेट के जरिए आगे उसका वितरण किया जाता था।
5 करोड़ रुपए के लेन-देन का भी दावा
EOW के अनुसार, कथित वसूली का पूरा सिस्टम तैयार करने में करीब 5 करोड़ रुपए के लेन-देन की जानकारी जांच में सामने आई है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान पप्पू बंसल द्वारा रकम दिए जाने की बात सामने आई।
वहीं, निखिल चंद्राकर और नवनीत पर रकम लेकर उसे सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इन दावों से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी पूरक चालान में शामिल किए जाने की बात कही गई है।
7 WhatsApp ग्रुप के जरिए बातचीत और निर्देश
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित सिंडिकेट के सदस्य आपस में बातचीत और पैसों से संबंधित निर्देश देने के लिए 7 अलग-अलग WhatsApp ग्रुप का इस्तेमाल करते थे।
EOW ने जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन, WhatsApp चैट, डायरियों और बैंक लेन-देन से मिली जानकारी को भी चालान का हिस्सा बनाया है। एजेंसी का कहना है कि इन साक्ष्यों से कथित वसूली और रकम के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली।
अलग-अलग जिलों में बैठकें, ‘CM House’ के नाम से बुकिंग का दावा
EOW ने दावा किया है कि अनुराग दीवान के जब्त मोबाइल से 15 जुलाई 2020 के आदेश से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगी अलग-अलग जिलों में जाकर बैठकें करते थे।
एजेंसी को जांच के दौरान विश्राम गृहों में ‘CM House’ के नाम से बुकिंग कराए जाने से संबंधित साक्ष्य मिलने का भी दावा है। इसके अलावा बालको और अंबुजा से जुड़े पत्राचार को भी चालान में शामिल किया गया है।
EOW के अनुसार, एक पत्राचार में परिवहन बिलों में 25 रुपए प्रति टन की राशि जोड़ने का उल्लेख मिला है।
कोयले के अलावा पैलेट से 100 रुपए प्रति टन वसूली का आरोप
जांच में कोयले के अलावा लौह अयस्क पैलेट के परिवहन पर 100 रुपए प्रति टन की कथित अवैध वसूली का मामला भी सामने आया है।
EOW के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य की भूमिका की जांच की गई। एजेंसी का दावा है कि पैलेट उद्योगपतियों की बैठक लेकर उन्हें सूर्यकांत तिवारी या उसके सहयोगियों को 100 रुपए प्रति टन देने के निर्देश दिए गए थे।
जांच के दौरान जब्त डायरियों में भी कथित वसूली से संबंधित एंट्री मिलने की बात EOW ने कही है।
9500 पन्नों के चालान में डिजिटल से लेकर बैंक रिकॉर्ड तक शामिल
छठे पूरक चालान में EOW ने कथित घोटाले से जुड़े विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों को शामिल किया है। इनमें जब्त मोबाइल फोन, WhatsApp चैट, डायरियां, बैंक लेन-देन और विभिन्न विभागों एवं कंपनियों के बीच हुए पत्राचार प्रमुख बताए गए हैं।
फिलहाल यह पूरा मामला न्यायालय के समक्ष है और EOW की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
